ज़िंदगानी दर्द की
सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’ छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश) ********************************************************************************************* इक मुकम्मल दास्तां है ज़िंदगानी दर्द की। मुस्कुराते लब के पीछे है निशानी दर्द कीl ठोकरों के बीज बो कर सींचती है अश्क से, ग़म की फसलें सब्ज़ करती बागबानी दर्द कीl गंगा यमुना में मिलाते कारखानों का ज़हर, अब नदी का ये सफ़र भी है रवानी … Read more