जब तुम न होगे
रेखा बोरा लखनऊ (उत्तर प्रदेश) ************************************************************* क़तरा-क़तरा पिघलेंगी रातें तब… ख़ामोश निगाहें ढूँढा करेंगी… रातों के काले सायों में तुमको…। चाँद का मायूस चेहरा देखकर, सितारों की आँखें भी नम होंगी, और मैं फिर से… बिखरे लफ़्जों को समेटकर… पिघलती रात की स्याही से फिर से, इक नज़्म लिखूँगी नाम तेरे…। हाँ! यही बात होगी… … Read more