प्रेम इबादत है,पूजा है
अख्तर अली शाह `अनन्त` नीमच (मध्यप्रदेश) **************************************************************** प्रेम लोक परलोक सुधारे, मेरा तो अनुमान यही है। प्रेम इबादत है,पूजा है, भक्ति यही,भगवान यही है॥ प्रेम को जिसने भी पहिचाना, उसने सबको अपना माना। रब का रूप देखकर सबमें, सबको सेवा लायक जाना॥ तम में कर देता उजियारा, लासानी दिनमान यही है। प्रेम इबादत है,पूजा है, … Read more