नेहा ‘एक प्रेरणा’

तृप्ति तोमर `तृष्णा` भोपाल (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* अंदाज इनका जटिल,अलग और सटीक, व्यक्तित्व है सहज,सौंदर्य का प्रतीक। मौन मूर्ति-सी मूरत है जिनकी, सबसे जुदा है शख्सियत इनकी। गागर में सागर-सी इनकी उपमा, झलके तो बिखरे इनकी गारिमा। जहाँ जाती हैं बनाती हैं अपनी अलग ही पहचान, परिश्रम,कला,कर्मठता से मिला मान-सम्मान। प्रकाश से रोशन रहे इनका संपूर्ण जीवन, … Read more

जिंदगी

प्रेमशंकर ‘नूरपुरिया’ मोहाली(पंजाब) **************************************************************************** जीवन में आती है सुख-दु:ख की छांव, जिंदगी में बढ़ाना सोच-समझकर पांव। वैसे तो बहुत माहिर हैं जिंदगियां यहां, जिंदगियों ने बसाये हैं संघर्षों के गांव॥ कठिन संघर्षों का पिटारा है जिंदगी, वाद-विवादों का निपटारा है जिंदगी। मीठे-मीठे चेहरों में छिपा है धोखा, कटु बोलों में स्पष्ट नजारा है जिंदगी॥ जीवन … Read more

नुमाइश नहीं है मोहब्बत

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ******************************************** किसी से मोहब्बत करना, बहुत अलग बात है। मोहब्बत कर के दिल में, उतर जाना बड़ी बात है। मगर लोगों ने मोहब्बत को, एक नुमाइश बना दिया। आज इससे तो कल उससे, करके दिखा दिया॥ मोहब्बत कभी भी नुमाइश की, चीज हो नहीं सकती। जो ऐसा करते हैं, वो मोहब्बत कर … Read more

फैसला करते हैं स्वीकार

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** शांति एकता का मिला,हम सबको पैगाम। जो भी आया फैसला,घर आये प्रभु रामll हो मोहब्बत हर तरफ़,बना रहे ये प्यार। सदभावी पैगाम हो,सच्चा हो व्यवहारll ये तो जीत न हार है, जीता बस इंसान। देखा सबने आज तो,जीता हिन्दुस्तानll घर में आये लौट कर,मनो खत्म वनवास। मिला आज घर राम को,ये … Read more

टीस

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’ बहादुरगढ़(हरियाणा) *********************************************************************** रिश्ते अब रिश्ते नहीं,रिसते हो गये,रिस-रिस कर देते हैं टीस, सदस्य घर में दो हों या पांच,नहीं बची अब रिश्तों में पहले जैसी आँचl दूरियाँ बदल गईं मीलों दूर में,चाहे रहते हों कितने ही एक-दूसरे के पास, भाई से भाई अलग हुए,जुदा हुए,बहनें भी रहतीं देखो कितनी उदासll पति-पत्नी का … Read more

हम भीड़ से बचते रहे

डॉ.अमर ‘पंकज’ दिल्ली ******************************************************************************* (रचनाशिल्प:२२१२ २२१२) उनसे नहीं रिश्ते रहे, चुपचाप बस घुटते रहेl दुश्वारियाँ तो थीं मगर, बिंदास हम बढ़ते रहेl बेफ़िक्र मुझको देखकर, बाजू में सब चिढ़ते रहेl पत्थर लिये थे हाथ सब, हम भीड़ से बचते रहेl क्यों दुश्मनों को दोष दें, जब दोस्त ही लड़ते रहेl हँसने को थे मजबूर हम, … Read more

चंदा मामा

सुनील चौरसिया ‘सावन’ काशी(उत्तरप्रदेश) *********************************************** तारों की बरात लेकर, आ गये चन्दा मामा। दूल्हा बनकर दुनिया में छा गये चन्दा मामा॥ चन्दा मामा निकल पड़े हैं, मामी की तलाश में। दर-दर भटक रहे हैं देखो, बादल संग आकाश में॥ प्यारे-प्यारे सारे तारे, भूल गए हैं रास्ता। भटक गए हैं,लटक गए हैं, कैसे करेंगे नाश्ता॥ निशा-रानी … Read more

फिर जग में चित क्यों हारा है

गोलू सिंह रोहतास(बिहार) ************************************************************** ये कोमल हृदय तुम्हारा है, ये प्रिय आँखें तुम्हारी हैं। इनमें नीर की धारा है, इनमें जीवन का सार सारा है। फिर जग में चित क्यों हारा है ? जग पे चित क्यों हारा है…? ये तन का माया जाल है, सर के काले बाल हैं। ये जो मुझे रुप-रंग मिला … Read more

आत्मजा

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* आत्मजा खंडकाव्य से अध्याय-१५  बार-बार मस्तक पर दस्तक, दे-दे जाती उनको पत्नी द्वार खोल कर कभी झाँकते, फिर कर लेते बंद सिटकिनी। कभी सत्यता दिखती उनको, प्रिय पत्नी के सुदृढ़ कथन में कभी प्रभाती की सुयोग्यता, प्रगति सुनिश्चित करती मन में। दोनों सत्य खींचते क्रमश:, मची हृदय में रहती हलचल मन … Read more

मैं जैसा हूँ

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** पागल हूँ मैं तो,अब मैं क्या करूँ अब नहीं अक्ल तो नहीं है अक्ल, जमाना तो यह बदलने से ही रहा नहीं बदलेगी अब यह मेरी शक्ल। हर शख्स लगा मुझे,मुझ जैसा फिर महफ़िल से मैं गया निकल, निजात मिले मुझे परेशानियों से तब दूंगा इनके फटे में,मैं दखल। कुछ … Read more