जिंदगी तो आज ही है

राज कुमार चंद्रा ‘राज’ जान्जगीर चाम्पा(छत्तीसगढ़) *************************************************************************** जैसे आज गुजरा है कल भी गुजर जाएगा, वर्षों से जिस पल का इंतजार था आएगा… और वो पल भी गुजर जाएगा। कल की आस में आज को क्यों गवांए, मन में कोई झूठे सपने क्यों सजाए… वक्त की रफ्तार है न रुका था न रुकेगा आएगा, और … Read more

`हनी` की वैतरणी

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग,और लोग क्या कहेंगे इसकी चिंता किए बगैर कुछ काम कुछ लोग कर लेते हैं,तो बाद में मुँह दिखाने के लायक भी नहीं रहते,क्योंकि जब लोग कहते हैं तो इज्जत का फालूदा ही बनता है। अब हनीट्रैप को ही देख लो, लिव इन में हनीमून … Read more

पंकज भूषण को मिला `काव्य गौरव` सम्मान

देवघर(झारखंड) | युवा लेखक पंकज भूषण पाठक प्रियम को साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु वाराणसी(उत्तरप्रदेश) के अनंत आकाश हिंदी साहित्य संसद राष्ट्रीय मंच ने काव्य गौरव सम्मान से सम्मानित किया है। मंच द्वारा पिछले माह आयोजित राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में देशभर के ख्यातिप्राप्त कवियों के साथ पंकज ने मंच साझा किया था। साहित्य … Read more

कर `विवेक` को संतुलित

डॉ.एन.के. सेठी बांदीकुई (राजस्थान) ************************************************************************* जिसमें विवेक हो वही,विजय करे संसार। जीवन सार्थक है वही,बाकी सब बेकारll सब विवेक से काम ले,कार्य होय साकार। बिन विवेक सब शून्य है,जीवन बिन आधारll मानव पशु से है अधिक,होता उसको ज्ञान। वैसे तो पशुतुल्य है,इससे अतिशय जानll बिन विवेक संसार में,जीना पशु के तुल्य। जो विवेक से युक्त … Read more

ख्वाब अधूरे रह गये…

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** बचपन कैसे बीत गए, पल में ओझल हो गए जो सोचा वो पाया नहीं, सपने जैसे खो गए… ख्वाब अधूरे रह गए…l कुछ सपने तो सपने हैं, शायद वो ही मेरे अपने हैं कभी इजहार किया ही नहीं, दिल के अंदर बसते हैं कुछ धुंधले से हो गए… ख्वाब अधूरे रह…l … Read more

रोमांच से भरी पहली यादगार यात्रा

सुश्री नमिता दुबे इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************** २७ सितम्बर विश्व पर्यटन दिवस विशेष………. उन दिनों समाज,देश विकास की ओर था,लोगों की सोच में अब बदलाव भी आने लगा था,किन्तु कहीं न कहीं अभी भी लोगों की सोच में लड़कियों के साथ पक्षपातपूर्ण रवैया विद्यमान थाl लड़कियों का अकेले बाहर निकलना बदसलूकी माना जाता था। यद्धपि,मेरे घर में … Read more

हिंदीभाषा माला

मधुसूदन गौतम ‘कलम घिसाई’ कोटा(राजस्थान) *****************************************************************************  (तर्ज:चांदी की दीवार न तोड़ी, प्यार भरा दिल…,रचना विधान-१६,१४ पर यति वाला,ताटक छंद पर आधारित) हे हिंदी तू उर में सजती,सुमन सुगन्धित माला है, तुझसे ही यह भारत विकसित,तैने इसे सँभाला है। तेरे ही आँचल ने पाला,तुझसे सब बहना-भाई, तेरे शब्दों से खेल-खेल,दुनिया में ताकत पाई। तेरे रस-छंद-अलंकारों,ने अपनी … Read more

नैतिक हिन्दी वर्ण माला…

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’ बूंदी (राजस्थान) ****************************************************************** अ से अनार,आ से आम, पढ़-लिख कर करना है नाम। इ से इमली,ई से ईख, ले लो ज्ञान की पहली सीख। उ से उल्लू,ऊ से ऊन, हम सबको पढ़ने की धुन। ऋ से ऋषि की आ गई बारी, पढ़नी है किताबें सारी। ए से एड़ी,ऐ से ऐनक, … Read more

दर्पण

मनोरमा चन्द्रा रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************** अंतर्मन में उत्पन्न भाव को, दर्पण दिखा जाता। चेहरे के हर रंग को, बखूबी बयाँ कर जाता॥ आत्मबोध कराता नित, शीशा,आईना कहाता। हर पल इंसान को, सच्चाई से सरोकार कराता॥ शक्ल पर छाया दृश्य, इससे छिपाए नहीं छिपता। उदासी हो या गम,खुशी, परछाई बन झलकता॥ पारदर्शी गुणों से सुसज्जित, सत्यता से … Read more

कल और आज

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ******************************************** कल ने कल से कहा- कल मिलोगे क्या तुम ? आज सुन कर कल पर हँस वो पड़ा। कल ने पूछा आज से- तुम क्यों हँसे ? तो आज ने कल से कहा- यही सुनते आ रहे हैं वर्षों से, पर जिंदगी में कल कभी आता ही नहीं। और तुम कल … Read more