सृष्टि का उदगम हो तुम

गोपाल चन्द्र मुखर्जी बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************************************ विश्व कन्या दिवस विशेष………. सृष्टि का उदगम हो तुम कन्या, छोटी-सी कोमल पंखुरियाँ। तुम ही हो सुंदरी तिलोत्तमा, रसकुम्भ धारिणी,जगत प्रसूता कन्या। तुम ही हो धात्री,जगत जननी, दुलारी के रूप से जग में अवतारिणी। अभिमानिनी,चंचला,नटखटी, रह-रह गूंजती है आपकी नुपुर ध्वनि। छोटी-छोटी कलाइयों में शोभे कंगना, लाल टिप और … Read more

मुल्क और मीत

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** मितवा मुझे तो जाना होगा, दिल को तो समझाना होगा। वतन का साथ निभाने को, अपनों का हाथ बंटाने को… मुझे सरहद पे जाना होगा। मितवा…। मितवा अभी तुम आए हो, आँखों में ख़्वाब बसाए हो। थे आतुर तुम तो आने को, क्यूँ आतुर फिर जाने को ? ये … Read more

माँ भारती का वन्दन..ज्यादा अच्छा है

डॉ.दिलीप गुप्ता घरघोड़ा(छत्तीसगढ़) ******************************************************** सैर सुबह की मित्रों के संग कितना अच्छा है, निक्कर-जूता…पहने मोटू एकदम बच्चा हैl ️ शुगर-बी.पी.-गैस दौड़ाता रोज सुबह सबको, कसरत करके स्वेद बहाना कितना अच्छा हैl ️ जांच के दौरान डरा-डरा कर डॉक्टर धमकाता, भय दिखाकर ऐंठना तो,बिल्कुल नहीं अच्छा है ?? बीबी ने तो की हुई है…दूध,मिठाई,बन्द, डर-डर,छुप-छुप..मीठा खाना … Read more

जीवन में उत्साह जगाती है ‘पग-पग शिखर तक’

आरती सिंह ‘प्रियदर्शिनी’ गोरखपुर(उत्तरप्रदेश) ***************************************************************************************** झाबुआ (मध्य प्रदेश)निवासी प्रदीप अरोरा की संदेशात्मक एवं विचारात्मक कृति ‘पग-पग शिखर तक’ का प्रकाशन हो चुका है। प्रखर गूँज प्रकाशन द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक कविताओं का सुंदर संग्रह है। प्रदीप अरोरा के कथनानुसार यह पुस्तक निराशा के दौर से गुजर रहे पाठकों के बंजर मन में उत्साह का बीजारोपण … Read more

चाँदनी हँसती रही

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- फूल पर मँडराया भँवरा,डालियाँ हिलती रही, खिलखिलाती कलियों के सँग चाँदनी हँसती रही। हँस लो जितना हँसना है,कल बीन कर ले जाएँगे, कलियाँ मुरझा-सी गयी और चाँदनी हँसती रही। सेज पर मधु यामिनी की दी बिछा इक शख्स ने, सिसकती कलियाँ रही और चाँदनी हँसती रही। देखता था मैं … Read more

वक्त के साथ समर

मच्छिंद्र भिसे सातारा(महाराष्ट्र) ********************************************************************************** पगला मित्र समय हमारा खफ़ा हमसे हो गया, संग था कभी हमारे आज दुश्मन हमारा हो गया… निकला था कभी फूल बिछाने पथ पर हमारे, लथपथ देखने हमें पथ काँटों-से सजाता गया। अँधियारा है पर निशा का अहसास नहीं, उजियाला है पर सूरज-सी चमक नहीं… प्यासा पथिक मैं पर सुजल की … Read more

बाल केन्द्रित शिक्षा में शिक्षक की भूमिका

डॉ. प्रभु चौधरी उज्जैन(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* “शिक्षा जीवन का उजास है, शिक्षा क्षमताओं का विकास है। बाल हृदय यदि एक सुवास तो, शिक्षा उसका ही सुझाव हैll” वास्तव में शिक्षा एक महत्वपूर्ण व सर्वव्यापी विषय है। यह मानव की विशेष उपलब्धि है। शिक्षा ने हर युग में समाज को दिशा व स्वरूप देने में सहायता की … Read more

आने वाली पीढ़ी का पथ प्रदर्शित करेगी `सदी के सितारे`

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** सदी के सितारे डॉ. देवेन्द्र जोशी की एक विशिष्ट कृति है, जिसमें देश के २३ विशिष्ट व्यक्तित्वों पर उनके आलेख समाहित हैं। इस पुस्तक में जिन विभूतियों पर डॉ. जोशी ने कलम चलाई है,वे कहीं न कहीं भारतीय जनमानस पर अपनी अमिट छाप छोड़ते हैं। लेखक डॉ. जोशी ने अपने … Read more

तपती धरती राह निहारे

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) ************************************************************** धरती तपती राह निहारे, पेड़-पौधों का चित्त उदास जीव-जन्तु का जल-जीवन, तड़प-तड़प करें पुकार। पलाश के फूल ज्यों मेघ हैं क्वार के, गड़-गड़ाहट में चित्त दहलाए बिन बरखा ही नभ में छाए, ऐसे नटखट शैतान। मेघों का कहना-वन है प्राण गहना, मानव -मानवता भूल गए छीना है प्रकृति का दामन, पर्यावरण … Read more

स्वीकारो या उपेक्षित करो

सविता सिंह दास सवि तेजपुर(असम) ************************************************************************* ये जो संकोच पलता है ना मन में तुम्हारे, मेरे अस्तित्व को स्वीकारने या नकारने के लिए, इसे तुम थोड़ा-सी ढील दो… देखो मैं कोई पतंग-सी उड़ती हूँ, या तुम्हारे अहं के खूंटे से बंधी रहती हूँ, इतना ही तो आकलन है मेरी इस काया काl आत्मा तक कहाँ पहुँच … Read more