वैश्विक हिंदी और हम

दीपक शर्मा जौनपुर(उत्तर प्रदेश) ************************************************* हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. किसी भी राष्ट्र की संस्कृति उस राष्ट्र की भाषा में निहित होती है। भाषा का अनुवाद मात्र करने से संस्कृति में परिवर्तन आ जाता है। हिंदी भाषा के ‘प्रणाम’ का बोध हमें अंग्रेजी भाषा के ‘गुड मार्निंग’ से नहीं होता। ‘क्षमा करना’ को ‘साॅरी’ शब्द कहना … Read more

साहित्य की भूमिका और हिंदी

रश्मि लता मिश्रा बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ****************************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. हिंदी भाषा के विकास हेतु साहित्य की समृद्वि आवश्यक है,क्योंकि साहित्य समाज का दर्पण है,तो जाहिर है कि जब से समाज का अस्तित्व इस दुनिया में है तभी से साहित्य का भी। डॉ. हरदेव बाहरी के अनुसार-“साहित्य की भूमिका प्राचीन वैदिक काल से चली आ … Read more

अमृत से भी मीठी बोली

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. मुझे नहीं है सभी विश्व की भाषाओं का ग्यान, मैं करता हूँ अपनी हिंदी भाषा पर अभिमान। हिन्दी वेदों की वाणी है हिन्दी भारत की पहचान, भारत का जन-जन करता है हिन्दी का सम्मान। भारत भाल का मुकुट है ये हिन्दी ही मातृ समान, उर्दू,इंग्लिश … Read more

भाषा निहित समाज है

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. भाषा निज सम्मान है,भाषा से पहचान। भाषा निहित समाज है,भाषा से अरमान॥ मातृभाषा से अपनी,करते सब हैं प्यार। मातृभाषा बोल बड़ी,है अपना हथियार॥ हिंदी भाषा हिन्द की,अंग्रेजी को छोड़। दिल बसा ले स्वदेशी,इससे नाता जोड़॥ हिंदी भाव सहज बड़ी,मीठे इसके बोल। भाषा सब हिंदी खड़ी,कानों … Read more

संस्कारों का प्रतिबिम्ब हिंदी

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. हम सब बचपन में शाला जाना शुरू करते हैं और ज्ञान की प्राप्ति करते हैं। शाला में हम कहीं विषय की पढ़ाई करते हैं,जिनमें हिंदी विषय भी एक है,लेकिन दुःख की बात यह है कि आज भी हम हिंदी का इस्तेमाल करने पर शर्म महसूस करते हैं। … Read more

जीवन की ऊर्जा हिन्दी

सुरेश चन्द्र सर्वहारा कोटा(राजस्थान) *********************************************************************************** हिन्दी केवल नहीं हमारे भावों की अभिव्यक्ति, यह तो है जीवन की ऊर्जा प्राणों की है शक्ति। देती आई राष्ट्र-एक्य को एक यही आधार, भारत के भाषा-पुष्पों का यही पिरोती हार। एक सूत्र में जोड़ रही है यह सारा ही देश, इसको बोलें तो लगता है महका-सा परिवेश। हो आदर … Read more

अनेकता में एकता हिंदी

अनिल कसेर ‘उजाला’  राजनांदगांव(छत्तीसगढ़) ****************************************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. हिंदी हिंदी सुन्दर हिंदी, सूझ-बूझ नई क्रांति हिंदी। ज्ञान हिंदी मान हिंदी, बन गई पहचान हिंदी। गंगा-सी पावन हिंदी, साहित्य की जान हिंदी। प्यासे की तृप्ति हिंदी, पूजा की थाल हिंदी। भक्तों की भगवान हिंदी, अनेकता में एकता हिंदी। मधु-सी मिठास हिंदी, मीरा का प्यार हिंदी। … Read more

हिंदी-शतावली

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’ बूंदी (राजस्थान) ****************************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. मन मन्दिर की आरती हिंदी, भारत की माँ भारती हिंदी। हिन्दजनों को तारती हिंदी, ज्ञानीजनों की सारथी हिंदी। शब्द नए-नए जारती हिंदी, शब्दकोश को सारती हिंदी। सर्वरूपों को धारती हिंदी, जग भाषा में उदारती हिंदी। नित नए शब्द ढालती हिंदी, आप विद्वता विशालती … Read more

हिन्दी अलख जगाएंगे

आशीष प्रेम ‘शंकर’ मधुबनी(बिहार) ************************************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. हम बन्दे हैं भारत माँ के अपना फर्ज निभाएंगे, हिन्द देश,हिन्दी भाषा की घर-घर अलख जगाएंगे। यह भाषा हर नाम सिखाती हर दिल में अरमान जगाती, है दुनिया में इसकी रौनक यह हमको पहचान दिलाती। इसका कर्ज बहुत है हम पर कैसे करुं बयां किस कदर, … Read more

बैंकिंग व अन्य वित्तीय संस्थानों में हिंदी का महत्व

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’ झज्जर(हरियाणा) *********************************************************************** हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष……………….. वित्तीय व्यवसाय सामान्यजन से जुड़ा है। पिछले २ दशक में बैंकिंग व अन्य वित्तीय संस्थानों का स्वरूप काफी बदल गया है। घंटों-घंटों कतार में खड़े रहने वाला,थका देने वाला माहौल आज कितना आसान हो गया हैl नई तकनीक के प्रचार व प्रसार,उसकी महत्ता,गुण,उपयोगिता ने आज मानव … Read more