रहें पाखंड से बचकर

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** एक थे पाखंडी पंडित,करते पूजा-पाठ थे, हरदम स्वार्थ सिद्धि में रहते आठों याम थे। अपना फायदा हरदम देखते, फायदे के सिवा बात नहीं करते। हरदम अपना दांव लगाते, रुपए खातिर दौड़ के आते। राहू-केतु का भय दिखाकर, लोगों को बहला फुसला कर। अपनी रोटी खूब कमाते, लोगों को मूर्ख रोज … Read more

तेरा वजूद

ऋतुराज धतरावदा इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* नहीं जानती है तू कहाँ तक फैला है तेरा वजूद, फूलों की खुशबूओं दिल तक छूते हर इक स्पर्श, गोधूली से नहाती साँझ चौके से उठती भीनी-सी लहर, धुँध में डूबी सुबह मस्ज़िद की पहली अज़ान मंदिरों की संध्या आरती, पहाड़ी नद के नाद चीड़ के जंगल में झाँकती किरण बूँदों … Read more

विकास की लहर

सुशीला रोहिला सोनीपत(हरियाणा) *************************************************************************************** राजनीति बदेलगी बदलेगा हिन्दुस्तान हमारा, सत्य का साम्राज्य होगा विश्व में हो भारत प्यारा। भष्टाचार का तिमिर हटेगा,चहुँओर हॊगा उजियारा, ईमानदारी की सरकार बनेगी,विकास का परचम लहराए। योगी की छाया,मोदी का साया,साथ सदगुरू का होगा, माया है आनी-जानी,सत्य का प्रकाश होगा। दुर्ग की रानी है चंचल चित्त में छाई उदासी है, … Read more

प्रासाद

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** यात्रा के दौरान देखे कई प्रासाद, कुछ प्रासाद अपनी कहानी कहता हुआ प्रतीत हुए, तो कुछ की दीवारों में कैद कितने राज लगेl प्रासाद के झरोखे से झाँकती हवा पुरवाई, अंदर दरवाजों में छुपा रहस्य, हर ईंट की अपनी बयानी काश बाँट ले कोई, उन सदियों की दबी कहानीl कभी … Read more

ऐसी अमर कहानी हो

प्रेक्षा डॉन गोधा ‘परी’ दुर्ग (छत्तीसगढ़) ************************************************************* ऐसी अमर कहानी हो माँ ऐसी अमर कहानी हो, एक ऐसा इतिहास रचाऊँ सबके मन को मैं भा जाऊं। हर कोई बनना चाहे बिल्कुल मेरे जैसा, ऐसी अमर कहानी हो माँ ऐसी अमर कहानी होll जब बात हो संस्कारों की सब लोग मेरा उदाहरण दें, जब बात हो … Read more

गुपचुप निमंत्रण

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** आज मुझको मिल रहा है प्यार का गुपचुप निमंत्रण, कौन समझेगा कि मन की चाह पूरी हो रही है। क्यों किसी की राह देखूं पथ में आँखें बिछाये, क्यों किसी के सामने बैठूं बनूं उसका पुजारी। क्यों लिखूं पाती किसी को, प्यार का संदेश लिखकर जबकि करता रुप ही खुद, … Read more

रूप और स्वभाव

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* रूप से भी अत्यधिक सम्मान है स्वभाव का, रूप है बेकार-सा अभाव यदि इस भाव का। रूप नश्वर है जगत में स्वभाव ही अमृत है, नेह यदि है मनुज में,अमर उसका सत्व हैll नेह चक्षु लब्ध हो तो कुरूप सुंदर रूप है, नेह धन का धनिक मानव रंक ही कर … Read more

आओ हम सौगंध उठाएं

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* आओ हम सौगंध उठाएं, कर्म पथ पर बढ़ते जाएं। समाज से कुरीतियाँ हटाएं, जन-मन का हम ज्ञान बढ़ाएं। कर्तव्य कहीं जो डगमगाए, उस सोच को हम समझाएं। मातु-पिता सदा है पूजनीय, उनके मन विश्वास जगाएं। बहन-बेटियाँ रहें सुरक्षित, बच्चों को भविष्य बताएं। प्रकृति माँ की करें हैं पूजा, … Read more

क्यूँ मैं छंद के बंधन बाँधूं…

डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** क्यूँ मैं छंद के बंधन बाँधूं, क्यूँ पहनूं बंद अलंकार के कुदरत ने मुझको दे डाले, हसीन प्यार के ख्वाब सुहाने। क्यूँ मैं बाँधूं… बिजली की पैंजनियां दी हैं, स्वर्ग गंगा का गल-हार चाँद मुखडे़ पर दी है, गज़ब चाँदनी की मुस्कान। क्यूँ मैं बाँधूं… फूलों सी खुशबू में भीगा, … Read more

वीरों की धरती हिन्दुस्तान

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- वतन की शान है तो मेरी भी शान है, वतन की आन रखना मेरा ईमान है। वतन ही रब है मेरा ये मेरी जान है, इस दुनिया में सिरमौर मेरा हिन्दुस्तान है। वतन के वास्ते ही हम जियेंगे मरेंगे, वतन का सिर कभी भी नीचा न करेंगें। खाते हैं … Read more