कुछ यूँ ही…

डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** कुछ कहने-सुनने के लिए नहीं, कभी यूँ ही मिलने-मिलाने को आ। जानता है तू मुझे इतना ही काफी है, पहचान अपनी कुछ बढा़ने को आ। नहीं है ख्वाहिश कोई जिद अपनी मनवाने की, बस इतना ही कि तू मुझे रिझाने को आ। कहते हैं मिलने-मिलाने से मिटती हैं दूरियां, कुछ … Read more

माँ तुम मेरा जहान

शिवांकित तिवारी’शिवा’ जबलपुर (मध्यप्रदेश) ******************************************************************** रास्ता तुम्हीं हो और तुम्हीं हो मेरा सफ़र, वास्ता तुम्हारा है हर घड़ी और हर पहर। तुम ही मेरे जीवन की सबसे मजबूत कड़ी, तुम ही मुश्किलों में सिर्फ मेरे साथ खड़ी। मुझको धूप से बचाने बन के आती छाँव हो, तुम ही मेरा शहर और तुम ही मेरा गाँव … Read more

सीमाएँ जब टूटती हैं…

डाॅ.आशा सिंह सिकरवार अहमदाबाद (गुजरात )  **************************************************************** सीमाएँ जब टूटती हैं, बनी हुई मूरत को जब हथौड़े से तोड़ा जाता है, सदियों पुरानी मूरत पहले झेलेगी छोटे-छोटे वार, असंख्य प्रहारों के पश्चात एक आखिरी वार जो होगा सबसे ताकतवर, बिखर जाएगी मिट्टी। जब बिखर जाती है कोई बनी हुई मूरत, अब नयी मूरत बनने में … Read more

श्रद्धांजलि…सूरत के लाल

अविनाश तिवारी ‘अवि’ अमोरा(छत्तीसगढ़) ************************************************************************ जला सूरत,तस्वीर थी बदसूरत, प्रशासन था मौन,कैसी ये फितरतl झुलस गए मासूम,माँ उसको निहार रही, हड्डी के ढांचों में ममता निढाल विलाप रही। आग बुझी इमारत की,दिल की आग कौन बुझायेगा, क्या सिर्फ मुआवजों से मरहम लग पायेगा ? सुविधाविहीन इमारत पर कोचिंग का गोरखधंधा है, लील गया मासूमों को,मानवता … Read more

कैसे लिखूँ प्रेम गीत मैं

क्षितिज जैन जयपुर(राजस्थान) ********************************************************** अनय अधर्म का वर्चस्व चतुर्दिक प्रबल हो रहे अन्याय अत्याचार है, कवि! कैसे मान लूँ तेरे कहने पर प्रेममय यह मानव का संसार है? पशुत्व पूजित किया जा रहा अब मानवता आज त्रस्त व भयभीत है, सेवा करना छोड़ उस मानवता की बता तू ही कैसे लिखूँ प्रेम गीत मैं ? … Read more

कौन देगा हिसाब ?

अजय जैन ‘विकल्प इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************************* फिर जल गई कई जिंदगी, कौन देगा हिसाब… बस ढोलेंगे जिम्मेदारी, कौन मानेगा अपनी गलती ? लील गई लापरवाही की आग, मौत से बचने कॆ लिए भी पाई मौत… कोई नहीं मानता,कोई नियम, फिर उजड़ गए फूलों कॆ कई बाग। क्या होगा ! बस खानापूर्ति, देखते रहे ‘सूरत’ में हादसा,लेकर … Read more

जीवन में माधुर्य लुटाये,वो कविता होती है

राजेश पुरोहित झालावाड़(राजस्थान) **************************************************** शब्दों का मधुर गुंजन कविता होती है, भावना की अभिव्यक्ति कविता होती है। छन्द मात्रा लय ताल सुर कविता होती है, जीवन में माधुर्य लुटाये वो कविता होती है। प्रकृति का अतुलित आनन्द कविता होती है, संघर्षों में विजय दिला दे वो कविता होती है। सत्पथ पर सबको चला दे वो … Read more

माँ

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’ बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** ममतामयी माँ तुझ पर जान न्योछावर है, एक झलक पाने के लिए नयन तरसे हैं। तू छोड़कर कहां चली गई माँ, तेरी यादों के सहारे हूँ। साँसें केवल चल रही माँ, शरीर निर्बल लिए बैठा हूँ। माँ चीखती-चिल्लाती है, काम करके बोझ उठाती है। पेट भरती,पानी पीती, फुटपाथ पर … Read more

बचपन सुहाना

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** बचपन था कितना सुहाना, गमों से था मैं तब अनजाना मानता था मैं पिता का कहना, पढ़ना खेलना और मौज मनाना। बचपन था कितना सुहाना… आता याद मुझे बचपन का जमाना, प्यारा था कितना गुरुजी का डांटना डांटना-पीटना और दुलार से समझाना, सफलताओं में उनसे पुरस्कार पाना। बचपन … Read more

मन

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** मन चंचल है तू इतना बेचैन क्यों है मन, किस और भटक रहा है मन… घूम रहा है सपनों के संसार में ए मन, लौट कर आजा उस दुनिया से इस दुनिया में। जहां निराशा है अंधकार है उस और चलें ए मन, जहां सूरज का प्रकाश हो हर तरफ हरियाली … Read more