घोंसला

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* तिनका-तिनका चुन-चुन पँछी ने, बनाया एक नीड़ सजाया उसे, कपड़ों की चिन्दी उलझे धागों और टूटी-फूटी चीजों से, ताकि आने वाले नन्हें चूजों को जरा-सी भी, तकलीफ़ न हो। बड़े अरमानों से सेता है वो कई-कई दिनों तक अपने अंडों को, फूटते हैं अंडे चहकते हैं नन्हें चूजे, चोंच से … Read more

आतंक

गंगाप्रसाद पांडे ‘भावुक’ भंगवा(उत्तरप्रदेश) **************************************************************** प्रार्थना में उठे हाथ, उड़ गये चीथड़े। दीवारों पे बिखरा रक्त, लोग इधर उधर पड़े मिले। चारों ओर सिर्फ चीखें, कौन मनाये ईस्टर। पूरा चर्च था खून से सना, कितना भयानक मंजर। एक के बाद एक, सिलसिलेवार विस्फोट। एक विशेष ही समुदाय, को पहुँचाई चोट। रोते बच्चे,बिखरी महिलाएं, अधमरे बुजुर्ग। … Read more

भटकते युवा सोचो बारम्बार

विजय कुमार मणिकपुर(बिहार) ****************************************************************** ना करो तुम इतना प्यार कष्ट मिलेगा बारम्बार, झूठ-फरेब का सपना आएगा- हो जाओगे बर्बाद। लक्ष्य तुम्हारा मिट जाएगा दुःख-संकट से घिर जाओगे, इस जहाँ में छुप-छुप कर- मिटने के लिए तुम,तुल जाओगे। ये दुनिया एक चोला है जो समझ गया ना डोला है, अजर-अमर हो जाता है- देश को रौशन … Read more

बूँद-बूँद में गुम-सा…

सुनीता रावत  अजमेर(राजस्थान) ************************************************************* बूँद-बूँद में गुम-सा है, ये सावन भी तो तुम-सा है बूँद-बूँद में गुम-सा है, ये सावन भी तो तुम-सा हैl एक अजनबी एहसास है, कुछ है नया,कुछ ख़ास है कुसूर ये सारा मौसम का है, बूँद-बूँद में गुम-सा है ये सावन भी तो तुम-सा हैll चलने दो मनमर्ज़ियाँ, होने दो गुस्ताखियाँ … Read more

नहीं करें प्रकृति का क्षरण

नताशा गिरी  ‘शिखा’  मुंबई(महाराष्ट्र) ********************************************************************* विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… मौत का कैसा समां,दिखा रहा है क्यूँ ख़ुदा, प्रकृति के नजारे,क्यूँ कुपित लगे हैं सारे। बादल गरज रहे हैं,कहीं प्यासी तड़पती धरती, बिलख रहे हैं मासूम यहाँ पे,वहां पे बाढ़ आई। तबाही का खेल खेले,लाशों के ढेर इतने, दफनाने को जगह नहीं,सर छुपाने को घर … Read more

मैं पृथ्वी हूँ

टीना जैन  उदयपुर(राजस्थान) ********************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… ब्रम्हांड की खूबसूरत कृति हूँ, हाँ,मैं पृथ्वी हूँ। मुझसे आलिंगन करता समीर है, नक्षत्रों को चिढ़ाता,करता अधीर है। मेरे अंक में ही जीवन पलता है, अलग-अलग रूपों में ढलता है। हरियाली रज का मेरा आँचल है, सागर जल बनता मेरी पायल है। पर्वत नदियाँ करती मेरा … Read more

धरा पुत्र

क्षितिज जैन जयपुर(राजस्थान) ********************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… जो कर समर्पित जीवन अपना, करते रक्षित समस्त यह नृवंश अपने बलिदानों से सहते रहते, प्रकृति पर लगते जो विष दंश। कर पुरुषार्थ अहर्निश इस दिशा में, अमृत पान कराते इस धरातल को साधना कर गला गला देह अपनी वे, पूजते नभ अग्नि वायु वसुधा जल … Read more

इस धरा को स्वर्ग बनाएंगे

शशांक मिश्र ‘भारती’ शाहजहांपुर(उत्तरप्रदेश) ************************************************************************************ विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… हम छोटे-छोटे प्यारे बच्चे, कोमल टहन से सीधे सच्चे। नित आगे बढ़ते रहना है, दुःख-दर्द सभी के सहना है। मुझे चाहिए है मार्गदर्शन, और न कुछ भी कहना है। छोटी-छोटी पेड़ों की टहनी, सहयोग से ही बढ़ पाती है। आश्रय मिलता जब श्रेष्ठ का, एक … Read more

पुण्य भूमि मेरी धरा

सुषमा दुबे इंदौर(मध्यप्रदेश) ****************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… मेरे देश की सीमाएं रहें महफूज चारों ओर से, हर एक दुआ में समाई है यही शुभ भावना दिग-दिगंत तक कीर्ति गाथा के मधुर स्वर, देश मेरा हो अमर बस है यही मनोकामना। मिट्टी का कण-कण बने स्वर्ण रजत-सा, जर्रा-जर्रा महके मेरी मातृभूमि का जैसे चंदन … Read more

धरा रहे सदा यशस्वी.

प्रेरणा सेन्द्रे इंदौर(मध्यप्रदेश) ****************************************************** विश्व धरा दिवस स्पर्धा विशेष……… शुद्ध वायु,शुद्ध वातावरण, चारों ओर हरा-भरा। समेट कर अनेक तत्वों को, उपजाऊ बनाती धरा॥ मातृत्व का भाव और प्यार, सिर्फ देना है जिसका स्वभाव। हर मौसम में जो कष्ट सहे, सूखे बंजरता के जो सहे घाव॥ बारिश का इंतज़ार, जो बाँहें फैला कर करती है। और … Read more