लोभ में आकर न छोड़ें संस्कृति और समाज

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)************************************************** अक्सर हम संस्कृति की बात करते हैं,पर कोई पूछे कि संस्कृति है क्या,तो क्या सही-सही जबाब दे पाते हैं ? संस्कृति को परिभाषित करना कठिन है; क्योंकि यह कोई वस्तु नहीं है। यह समझने की चीज है। यह हमारी भावनाओं को उजागर करने वाला वह दीप है,जो हमें औरौं … Read more

छुईमुई बनता समाज

राकेश सैनजालंधर(पंजाब)*********************************************** उत्तर प्रदेश के मथुरा में मंदिर में नमाज पढ़ऩे के जुर्म में फैसल खान को गिरफ्तार कर लिया गया है। फैसल और साथियों के खिलाफ पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद साहिब का कार्टून प्रकाशित करने की घटना के बाद इतना विवाद भड़का कि,यूरोप के बाकी हिस्से भी जिहादी … Read more

हिन्दी वालों की हिन्दी वालों से हिन्दी के लिए लड़ाई

प्रो. अमरनाथकलकत्ता (पश्चिम बंगाल)****************************************** पूजनीय बड़े पिता जी और माता जी,आप लोग मुझे माफ कर देना। मैं आपका अच्छा बेटा नहीं बन पाया…मैं जा रहा हूँ। मैं जिन्दगी से परेशान हो गया हूँ। आप लोग मुझे माफ करना। राजीव के सुसाइड नोट का यह एक अंश है। ११ सितंबर २०२० को यूपीपीसीएससी का रिजल्ट आया। … Read more

सवाल अवश्य करना चाहिए कि,अपराध क्यों ?

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’धनबाद (झारखण्ड) ***************************************************** आजकल हमारे चारों ओर का वातावरण अपराधमय हो गया है। वर्तमान समय में किसी भी दिन के समाचारों पर ध्यान दिया जाए तो अपराधिक समाचार ही अधिक देखने व सुनने को मिल रहा है। विश्वास,सत्य,निष्ठा,कर्तव्य व परोपकार जैसे शब्द अब बोलचाल एवं सजावट की वस्तु प्रतीत होने लगें हैं। सत्यनिष्ठ … Read more

‘कोरोना’ का द्वन्द्व-ईश्वर या विज्ञान

डॉ. वरुण कुमारदिल्ली****************************** यह ‘तालाबंदी’ काफी लंबी खींची गई है और उसके बाद धीरे-धीरे खोलने (अनलॉक) की कोशिशें चल रही हैं। जब यह शुरू हुई थी तो नई स्थिति और नई चुनौती ने कई तरह से मनुष्य को उद्धेलित किया था-भय,बेबसी,गुस्सा,संवेदना,भविष्य में क्या होगा इसकी आशंकाएं आदि। इसने नए सिरे से एक वैचारिक प्रश्न को … Read more

बंधुत्व ही हिंदुत्व

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ************************************************** हर विजयदशमी को याने दशहरे के दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखिया नागपुर में विशेष व्याख्यान देते हैं,क्योंकि इस दिन संघ का जन्म-दिवस मनाया जाता है। इस बार संघ-प्रमुख मोहन भागवत से मैं इस बात से प्रभावित हुआ कि उनकी भाषा याने हिंदी इतनी शुद्ध और सारगर्भित थी कि,दिल्ली में तो ऐसी … Read more

जनता के घावों पर नमक महंगे होते चुनाव

ललित गर्गदिल्ली ****************************************************** चुनाव जनतंत्र की जीवनी शक्ति है। यह राष्ट्रीय चरित्र का प्रतिबिम्ब होता है। जनतंत्र के स्वस्थ मूल्यों को बनाए रखने के लिए चुनाव की स्वस्थता, पारदर्शिता और उसकी शुद्धि अनिवार्य है। चुनाव की प्रक्रिया गलत होने पर लोकतंत्र की जड़ें खोखली होती चली जाती हैं। चुनाव प्रक्रिया महंगी एवं धन के वर्चस्व … Read more

इंदिरा गाँधी:मौत की असली वजह अब भी रहस्य

गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)********************************************* पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान रखने वाली भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी समय से पहले इस दुनिया को अलविदा कह गई। इस ३१ अक्टूबर को इंदिरा गाँधी की हत्या को ३६ साल हो जाएंगे। ३६ सालों से इनकी हत्या और उसके बाद हुए सिख-विरोधी दंगों की छाया गाहे-बगाहे चुनावों … Read more

मजहब चलें मध्यम मार्ग पर

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ************************************************** भारतीय विदेश मंत्रालय ने विशेष कूटनीतिक साहस और स्पष्टवादिता का परिचय दिया है। उसने एक बयान जारी करके तुर्की के राष्ट्रपति तय्यब एरदोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को आड़े हाथों लिया है। भारत सरकार ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुअल मेक्रो का खुलकर समर्थन किया है। मेक्रो ने इधर इस्लामी अतिवाद … Read more

संप्रदाय-पंथ के नाम से अलगाव कब तक ?

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** घुमा-फिरा कर सभी लोग यह स्वीकार करते हैं कि,इस दुनिया को बनाने वाली एक ही शक्ति है।इसके आरंभ की कहानी सभी धर्मों की जो भी हो, सृष्टि का प्रारम्भ जैसे भी हुआ हो,लेकिन सत्य यह है कि सृष्टि का अंत मनुष्य की दुर्बुद्धि और स्वार्थ के कारण फैले प्रदूषण (वैचारिक,पर्यावरण, वातावरण आदि) … Read more