अपना समय भी आएगा

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** हरदम पतझर नहीं रहेगा, अली कली को खिलाएगा। कहे ‘उमेश’ धैर्य रखो तुम, अपना समय भी आएगा। दुख के बादल अब छँट जायेंगे, नभ-बीच शशि मुस्कुराएगा। कहे उमेश तुम हिम्मत ना हारो, अपना समय भी आएगा। शनैः-शनैः रैना जाएगी, उजाला सुनहरा आएगा। कहे उमेश प्रयास करो तुम, अपना समय भी … Read more

आषाढ़ के बादल

राजेश पुरोहित झालावाड़(राजस्थान) **************************************************** लेकर हल काँधे पर निकल गए भूमिपुत्र सारे, खुशियों को बांटने चले आये आषाढ़ के बादल। माटी की सौंधी-सौंधी महक से झूम उठे खेत, भूमिपुत्रों को मनाने आ गए आषाढ़ के बादल। ये इंद्रधनुषी सपनों को उम्मीदों के पंख लगाने, फिर उमड़-घुमड़ कर आ गए आषाढ़ के बादल। कूप बावड़ी ताल … Read more

संगम बादल-धरती का

सुश्री नमिता दुबे इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************** महक उठी इठलाई धरती, बादल के आलिंगन से। पशु-पक्षी लगे चहचहाने, पेड़-पौधे भी लगे लहलहाने। बारिश से अठखेलियाँ करते, फुदक रहे थे नौनिहाल। धरती के इस अदभुत स्वागत से, फूला नहीं समाया बादल भी आज। स्नेह की बारिश से उसने, भरपूर प्यार लुटाया…। तभी उठे गरम हवा के, गुब्बारे ने … Read more

अस्तित्व गाथा

ओमप्रकाश अत्रि सीतापुर(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************************* कब तक रखेंगे अपने को अंधेरे में, कब तक छिपते रहेंगे इतिहासों के पन्ने में। कब तक, हमारे अस्तित्व को सच्चाई से दूर, जातिवाद के अंधकार में भटकाया जाएगा, कब तक कोई हिरण्याक्ष, अस्मिता रूपी पृथ्वी को रसातल में छिपाता रहेगा। अब, तोड़ना होगा जातिवाद की कट्टर जंज़ीरों को, लड़ना होगा … Read more

हमारे पिता

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** प्यार और दुलार, सुंदर मीठी बयार ऐसा पिता का प्यार, कैसे करूं उनका गुणगान…। अपनी इच्छाओं को, देकर कुर्बानी हमारी जिंदगी कर दी सुहानी, घर की वो है मजबूत छत होंठों पर रखते मुस्कान। कैसे करूं उनका… हर दर्द की दवा रहे, परिस्थितियों से लड़ते रहे हमको भी समझाते रहे, सही … Read more

हमारे गाँव

वाणी बरठाकुर ‘विभा’ तेजपुर(असम) ************************************************************* बार-बार लौट जाते हैं, हमारे गाँव की उन धूल-कीचड़ भरी राहों पर, गाय बछड़े बैलों के झुंड से धुँधले धूल भरी राहों पर, चलते युवाओं के कदम… दोनों किनारों पर, लहराते धान के खेत खेतों में चिड़ियों की किलकारी में मदहोश मन… बरामदे में बच्चों के जोर-शोर से पढ़ते हुए … Read more

पहली बार मिले थे…

डॉ. आशा गुप्ता ‘श्रेया’ जमशेदपुर (झारखण्ड) ******************************************* जैसे पहली बार मिले थे,वैसे ही तुम मिला कराे, जैसे पुष्प बगिया में,वैसे ही तुम खिला कराे। हर आँसू मुस्कान बने,सुख-वैभव का विस्तार हाे, ढलना है ताे शबनम बनकर किसलय से तुम ढला कराेl मिट जाता जल-जलकर प्यार में पागल परवाना, स्नेह लिये दीपक-सा मन में,देे प्रकाश तुम … Read more

अनजान प्रियतम

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* सुनो चन्द्र वट, अनजान प्रियतम! मैं रहूँ ना रहूँ… मैं दिखूँ ना दिखूँ, अपनी साँसों में..यादों में..बातों में…, इन हवाओं में..फिज़ाओं में…घटाओं में… बारिश की बूंदों में…, पत्तियों की सरसराहट में… सुबह की पहली किरण में.., दोपहर की अलसाई धूप में… सुरम‍ई-सी शाम की पुरवाई में…, चाँद की चाँदनी रात में… … Read more

कर्म का नाम ही धर्म

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* एक देश है,इंसानों के मर्म एक हैं, तन,मन सब एक है,फिर क्यों तेरा धर्म अलग है। मानव है तू,तेरा कर्म ही धर्म है, न बाँटों प्रभु को,नाम पर प्रभु के, नाम अनेक पर भाव एक है भाव को समझो,कर्म का नाम ही धर्म है। धर्म पिता का पालन … Read more

घर बनाना बच्चों,मकान नहीं

काजल सिन्हा इन्दौर(मध्यप्रदेश) ************************************************************************* घर बनाना बच्चों,पर मकान नहीं, बारादरी इतनी लंबी ना बनाना कि हम हँसें तो तुम सुन ना सकोl घर बनाना बच्चों… दरो-दीवार इतनी सख्त ना बनाना, कि हमारे कहकहे दब जाएंl घर बनाना बच्चों… आँगन ऐसा बनाना कि साथ बैठ पाएं, हाथों में एक-दूसरे का हाथ रख पाएl घर बनाना बच्चों… … Read more