मामला ये सोच का

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** गुजर जाता है वक्त,रहता अफसोस-सा है अगर-मगर हो रही,मामला यह सोच का है, चल दिए आप मेरे अश्कों को पोंछ कर… किस्सा तो ये मेरा अब यहाँ रोज का है। सम्भल कर चलना आता है मुझे बखूबी गिरा तो कसूर उसकी कमर की लोच का है, यूँ तो कई खंजर … Read more

राष्ट्रभाषा हिन्दी है उत्कृष्ट

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरे मंडला(मध्यप्रदेश) ************************************************************************ हिन्दी हितकर है सदा,हिन्दी इक अभियान। हिन्दी में तो आन है,हिन्दी में है शानll हिन्दी सदा विशिष्ट है,हिन्दी है उत्कृष्ट। हिन्दी अपनायें सभी,होकर के आकृष्टll कला और साहित्य है,पूर्ण करे अरमान। हिन्दी में है उच्चता,’शरद’ सभी लें मानll हिन्दी का उत्थान हो,हिन्दी का सम्मान। हिन्दी पर अभिमान हो,हिन्दी का … Read more

मनुष्य…

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ ईश्वर की, सर्वोत्तम कृति मनुष्य है। जिसे रोने-हँसने, सोचने और समझने की उसे, शक्ति दी। सागर की असीम गहराइयों को, नापने और नभ की अंनत ऊँचाईयों को, छूने का सामर्थ्य दिया। फिर भी, न जाने मनुज उस परम शक्ति को क्यों, अपने से कमतर समझता है, और ख़ुद … Read more

बेटी दो कुल का मान होती है

डॉ.नीलिमा मिश्रा ‘नीलम’  इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) ************************************************************** परी जैसी सलोनी-सी बड़ी नादान होती है, चले आँगन में जब बेटी वो घर की शान होती है। विधाता की अलौकिक शक्ति का वरदान है बेटी, जनम लेती है जिस घर में वहाँ मेहमान होती है॥ कभी गुड़िया से गुड्डा की जो ख़ुद शादी रचाती थी, कभी जो … Read more

मन मेरा भी नहीं,मन तेरा भी नहीं

गोलू सिंह रोहतास(बिहार) ************************************************************** मन मेरा भी नहीं,मन तेरा भी नहीं, अब तो बस दोनों ओर से बहानों के तीर चलते हैंl आज भी कभी तन्हाइयों में सुगबुगाहट होती है, दिलों से होकर यादों के पीर चलते हैंl कल संग थे,बहुत खुश थे, आज अकेले हैं,होकर गंभीर चलते हैंl चलो,सीख लिया बहुत कुछ,हम सबने छोड़ … Read more

स्वरोजगार तुमको ढूंढना है

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** ऐसा रोजगार नहीं चाहिए, जिसमें राजनीति की बू आती है। घूसखोर जिसमें पैसा लेते हैं, और डिग्रीयां देखी नहीं जाती हैं। पैसों की शान-शौकत से वह, रोजगार तो हासिल कर लेते हैं। समाज में दिशा नहीं दे पाते वह, समाज में बदनाम हो जाते हैं। गरीब घर के हैं … Read more

मेरे लिए जीना है तुझे

विनोद सोनगीर ‘कवि विनोद’ इन्दौर(मध्यप्रदेश) *************************************************************** काँटों में रहकर गुलाब की तरह मुस्कुराना है तुझे…, आसमां में रहकर सूरज की तरह चमचमाना है तुझे…l सुरों में रहकर सरगम की तरह गुनगुनाना है तुझे…, रंगों में रहकर रंगोली की तरह जगमगाना है तुझे…l अंधेरे को चीरकर दीपक की तरह झिलमिलाना है तुझे…, मुश्किलें जीतकर विजेता की … Read more

जिंदगी

सुलोचना परमार ‘उत्तरांचली देहरादून( उत्तराखंड) ******************************************************* हमसे है जिंदगी, जिंदगी से हम नहीं। मिली है तो ये किसी, दुआ से कम नहीं। कभी ख्वाब दिखाती, ये मगरूर जिंदगी। कभी रुख पे घटा बन के, लहराती जिंदगी। कभी शामों-सहर बैठकर, रोयी ये जिंदगी। कहीं चोट कर गई, दिल पे ये जिंदगी। फिर भी उम्मीद की लौ, … Read more

रामराज्य समरस वतन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** कौशलेय प्रिय जानकी,रघुनन्दन सुखधाम। करें लोक कल्याण नित,शरणागत श्रीराम॥ कमलनयन मन दाशरथि,सीतायन आलोक। जगत रोग छल पाप प्रभु,करो मुक्त हर शोक॥ सकल विश्व संताप को,भय दारुण आतंक। हरो नाथ रघुवर प्रभो,प्रमुदित जग बिन रंक॥ नैतिकता अनुलेप से,मानवता अभिषेक। प्रगति प्रीति सच पथ प्रभो,राष्ट्र रहे नित एक॥ रामराज्य समरस … Read more

मुझसा नहीं मिलेगा

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** यादों को मेरी तुम गये क्यूँ भूल साथिया, तेरे कदम का था नहीं मैं धूल साथिया, ले के चिराग ढूँढना सारे जहान में- मुझसा नहीं मिलेगा तुझे फूल साथिया। परिचय-वकील कुशवाहा का साहित्यिक उपनाम आकाश महेशपुरी है। इनकी जन्म तारीख २० अप्रैल १९८० एवं जन्म स्थान ग्राम महेशपुर,कुशीनगर(उत्तर प्रदेश)है। … Read more