आओ मिलकर बनाएं नया घर

डॉ.सोना सिंह  इंदौर(मध्यप्रदेश) ********************************************************************* आओ मिलकर बनाएं घर, चिड़िया का छोटा-सा ताना-बाना सुंदर आओ मिलकर बनाएं नया घर, घर नदी का कल-कल बहता अविरल बनाएं घर पहाड़ का। उच्च शिखर से अधिक अटल, आओ मिलकर बनाएं नया घर हवा का सर..सर..सर..सर, करता सनन-सनन… आओ मिलकर बनाएं नया घर। नया बनाएं घर,जंगल का हरा-भरा गुप्त घना, … Read more

विडम्बना

सुशांत सुप्रिय  ग़ाज़ियाबाद (उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** उदास है, शिकंजी बेचने वालाl उदास है, भड़भूँजा बेचने वालाl उदास है, शकरकंदी बेचने वालाl नहीं बिक पा रही हैं इनकी देसी चीज़ें, लेकिन हरा है मौसम, बाज़ार काl वह देखो… कितनी भीड़ है, चिप्स और कोक-पेप्सी बेचने वाली दुकान पर, हँसते-हँसते दोहरे हुए जा रहे हैं पिज़्ज़ा-बर्गर के सभी … Read more

भीग रहा दिल का कोना

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** अश्क बहाकर आँख भिगोना। छोड़ो अब ये रोना-धोना। हँसते रहना बाहर-बाहर, अन्दर-अन्दर छुपकर रोना। अश्क नहीं बाहर से दिखते, भीग रहा पर दिल का कोना। रहना जिसको जग में आगे, सीखे कब वो अवसर खोना। खून पसीना एक करे जो, जीते जग में वो ही सोनाll परिचय … Read more

ख़्याल

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* धुँधलका शाम का गहराने लगा, आँच सूरज की मंद पड़ने लगी, शाम ने धीरे से करवट बदली, सोये अरमान फिर, मचलने लगे। खुल के बिखरे तेरी यादों के गेसू, मेरे जज़्बात ने फिर प्यार से, सँवारा इनको। तेरे अहसास ने, फिर रूह को छुआ मेरी, रात ने ज्यूँ ही फैलायी … Read more

वो चरित्रहीन हो जाती है…

सपना परिहार नागदा(मध्यप्रदेश) ****************************************** जब किसी पुरूष से उसकी मित्रता हो जाती है, वो मन ही मन थोड़ा ज्यादा जी जाती है। थोड़ा हँसती है,थोड़ा मुस्कुराती है, तब समाज की नजरों में वो चरित्रहीन हो जाती है। थोड़ा मन में दायरे से वो बाहर आ जाती है, अपनी पसंद का कुछ थोड़ा भी अच्छा कर … Read more

दीया

डॉ.सरला सिंह दिल्ली *********************************************** माटी कहती मुझसे ही, दीये सारे बनते हैं। फैल रही जगमग ज्योति, नाम दीये का होता है। बोली धरती री माटी, तू तो मुझसे ही है जन्मी। जन्म दिया ने तुझको, सब कहते बस माटी-माटी। फैल रही जगमग ज्योति, नाम दीये का होता है। कहे कुम्हार अरी री दीया, काहे तू … Read more

माता

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** हूँ हूँ….हो हो…. माई मेरी माई,आज हो जा तू सहाई, मैं दुनिया से गया मारा….आ…आ…. छोड़ तुझे कहाँ जाऊँ मैं, आ बन जा अब तू सहारा…आ…आ… माई मेरी माई,आज हो जा तू सहाई….l माई मेरी माई,आज हो जा तू सहाई….ll हूँ हूँ….हो हो…. दर तेरा छोड़ के मैं,कहाँ … Read more

सपने

प्रेमशंकर ‘नूरपुरिया’ मोहाली(पंजाब) **************************************************************************** प्रत्येक व्यक्ति के सपने, होते हैं सबके अपने। सपने जिनमें उड़ान होती है, मनुष्य के लिए सबसे खूबसूरत होते हैं, उसके सपने। इन सपनों से ही मानव, जीवनभर गतिशील रहता है। गतिशील रहना ही, मानव का कर्तव्य है। सपनों के मार्ग पर कितने, संघर्षों का सामना होता है। संघर्षों से लड़ना, … Read more

माँ

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* साहित्य की पाठशाला (रचनाशिल्प:चार चरण २२ वर्ण प्रति चरण,१०-१२ वर्ण पर यति, चरणान्त गुरु,(२११×७) +२ (भगण×७)+गुरु,चारों चरण समतुकांतl) कर्ण महा तप तेज बली, २१ १२ ११ २१ १२ सुत मात तजे पर मात रखे। ११ २१ १२ ११ १२ १२ वीर सुयोधन मीत मिले, २१ १२११ २१ १२ नित भाव सहोदर … Read more

इंसानियत हुई लहुलुहान है

राजकुमार अरोड़ा ‘गाइड’ बहादुरगढ़(हरियाणा) *********************************************************************** मन्दिर-मस्जिद का झगड़ा है राम-रहीम तो एक समान है, खून से खून जुदा हुआ… इंसानियत हुई लहूलुहान हैl हर कोई राजनीति की बिसात पर खेल रहा उठा-पटक की गोलियाँ, नैतिकता की धज्जियां उड़ी… बिखर गई हैवानियत को चोलियाँ। कहीं फूँक दी बसें तो कहीं रेल के डिब्बे जले, तो कहीं … Read more