तेरा ज़िक्र

श्रीकांत मनोहरलाल जोशी ‘घुंघरू’ मुम्बई (महाराष्ट्र) *************************************************************************** तेरा ज़िक्र एक बार निकला, तेरे बारे में बातें हज़ार हुईl आँखों का मिलना था या एक मुलाकात थी वो, उस रात खयालों की बरसात हुईl बातों-बातों में बातें निकलती गयी, कब सूरज डूबा,कब रात हुईl उस दिन जो मुड़ के देखा था तुमने, उसी दिन से मुहब्बत की … Read more

कर लो धरा पर हरियाली

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** सावन आया खेतों में हरियाली लाया, सुंदर ये नजारे खुशियों की बहारें। पेड़ों का सौंदर्य सूर्य की लाली, कर लो नेक कार्य धरा पर कर लो हरियाली। बारिश की बूंदें पानी की धार, हरियाली की मौसम जिंदगी है मजेदार। किसानों का चेहरा खिला राहगीर है परेशान, लोगों की सोच-अलग … Read more

चले आओ

डॉ.नीलम कौर उदयपुर (राजस्थान) *************************************************** चले आओ के बाधाएँ ३७० की हट गई, वादी-ए-गुल की फिजां महक में अपनेपन की, खुशबुएं घुल गईं। चले आओ के बहनों को देने तोहफा रक्षा-बंधन का, विस्थापितों के भी उजड़े आशियां सजा फिर, उनको वहाँ बसाने को। चले आओ के अब आशा का, संचार नस-नस में बहने लगा है, … Read more

हम सर पे कफन बांध कर चले

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** हम सर पै कफन बांध कर चले, आज देश है पुकारता। दुश्मनों को है ललकारता। साथियों चलो संवर के आज, माटी की सौगंध ले चले॥ इस देश से आतंक मिटाना, दुश्मनों को मार भगाना। जी-जान से इस देश की रक्षा, करने को प्राण हाथ ले चले॥ देश का झंडा चूमे … Read more

बिना नीड़ के बया बिचारी

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* कटे पेड़ के ठूँठ विराजी, बया मनुज को कोस रही। बेघर होकर,बच्चे अपने, संगी-साथी खोज रही। मोह-प्रीत के बंधन उलझे, जीवन हुआ क्लेश में। जैसा भी है,अपना है यह, रहना पंछी देश मेंll हुआ आज क्या बदल गया क्यों, कुटुम-कबीला नीड़ कहाँ। प्रातः छोड़ा था बच्चों को, सब ही थे खुशहाल … Read more

मत ये सजा दीजिए।

डॉ.अमर ‘पंकज’ दिल्ली ******************************************************************************* मुद्दतों जो छिपाया,बता दीजिए, आग जिस्मो-ज़िगर की बुझा दीजिए। हमनशीं रूठकर दिल जलाती रही, पास उनको कोई फिर बुला दीजिए। गैर का दिल बसेरा बना आपका, प्यार की मेरे मत ये सजा दीजिए। आपको गैर की बज़्म भाने लगी, मेरी क्या अब जगह है जता दीजिए। ख़्वाब तो ख़्वाब हैं,टूटते हैं … Read more

सबकी कर्मठ दादी

रेणु झा ‘रेणुका’ राँची(झारखंड) ******************************************************************* बचपन से देखा मैंने उस दादी को,वह सभी की दादी थी। हम उन्हें दादी कहते हैं,पापाजी भी दादी कहते हैं। यानी बच्चे,बड़े सभी की दादी। मेहता चाचा ने तो उन्हें सदाबहार, अन्तरराष्ट्रीय दादी की उपाधि दे दी थी। दादी मोहक व्यक्तित्व की धनी और ऊर्जा से सराबोर थी। उनका बस … Read more

मोहब्बत का समंदर बन जाऊँगा

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** इन यादों के संग मैं मोहब्बत का सफर बन जाऊँगा, निगाहें देखी जिसको भी मैं तो वो नजर बन जाऊँगा। चलना है जिंदगी के सफर में एक रोज सुबह से शाम, जहाँ-जहाँ बस्ती बस जाएगी,मैं वो घर बन जाऊँगा। पता नहीं जिंदगी की गाड़ी किस मोड़ पर कहाँ चलेगी, छोड़ कर … Read more

एक कदम चल….

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’ बूंदी (राजस्थान) ****************************************************************** (रचना शिल्प:इस पद्य में ‘अ’ के अलावा कहीं भी ‘अन्य स्वर की मात्रा’ का उपयोग नहीं किया गया है।) चल,एक कदम,एक कदम,एक कदम चल, जम-जम कर,रख कदम कर अब पहल। रतन बन चम-चम चमक कर उजल, नकल अब तजन कर,कर सब असल। रत जब करम पथ,पथ सब … Read more

दिले-दर्द अपना सुनाते नहीं

प्रदीपमणि तिवारी ध्रुव भोपाली भोपाल(मध्यप्रदेश) **************************************************************************** (वज़्न-१२२×३-१२, अर्कान-फऊलुन×३-फआ) बुलाए बिना हम हैं जाते नहीं। अग़र बोझ समझा निभाते नहीं। अदब से मिले जो भी मंज़ूर वो, कि ख़ैरात को हम उठाते नहीं। बरस बीत जाएं नहीं बात हो, दिले-दर्द अपना सुनाते नहीं। कई ज़ख़्म दिल में बता ना सकें, उधारी का मरहम लगाते नहीं। सियासत नहीं … Read more