केवल नक़ल की भाषा से आगे नहीं बढ़ा जा सकता

ई-संगोष्ठी:’भारतीय भाषाओं को रौंदता अंग्रेजी का साम्राज्यवाद’ मुंबई(महाराष्ट्र)। ‘वैश्विक हिंदी सम्मेलन’ के तत्वावधान में २४ अक्तूबर को ‘भारतीय भाषाओं को रौंदता अंग्रेजी का साम्राज्यवाद’ विषय पर ‘वैश्विक ई-संगोष्ठी’ का आयोजन किया गया। वरिष्ठ पत्रकार और भारतीय भाषा चिंतक राहुल देव ने कहा कि,केवल नक़ल की भाषा से आगे नहीं बढ़ा जा सकता। हिंदी बचाओ मंच … Read more

शरद पूर्णिमा:अमृत वर्षा की रात्रि

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)************************************************** शरद पूर्णिमा स्पर्धा विशेष….. पूर्णिमा तो हर माह में आती है,पर आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि का मान अनमोल होता है। इस दिन लक्ष्मी की पूजा होती है, क्योंकि माना जाता है कि इस दिन लक्ष्मी जी का जन्म हुआ था। इसे ‘शरद पूर्णिमा’ के नाम से जाना जाता … Read more

मजहब चलें मध्यम मार्ग पर

डॉ.वेदप्रताप वैदिकगुड़गांव (दिल्ली) ************************************************** भारतीय विदेश मंत्रालय ने विशेष कूटनीतिक साहस और स्पष्टवादिता का परिचय दिया है। उसने एक बयान जारी करके तुर्की के राष्ट्रपति तय्यब एरदोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को आड़े हाथों लिया है। भारत सरकार ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुअल मेक्रो का खुलकर समर्थन किया है। मेक्रो ने इधर इस्लामी अतिवाद … Read more

संप्रदाय-पंथ के नाम से अलगाव कब तक ?

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** घुमा-फिरा कर सभी लोग यह स्वीकार करते हैं कि,इस दुनिया को बनाने वाली एक ही शक्ति है।इसके आरंभ की कहानी सभी धर्मों की जो भी हो, सृष्टि का प्रारम्भ जैसे भी हुआ हो,लेकिन सत्य यह है कि सृष्टि का अंत मनुष्य की दुर्बुद्धि और स्वार्थ के कारण फैले प्रदूषण (वैचारिक,पर्यावरण, वातावरण आदि) … Read more

माधवी,अब तो बता दे…

अंशु प्रजापतिपौड़ी गढ़वाल(उत्तराखण्ड)************************************************** मेरा अज्ञान कई बार मुझे शर्मिंदा करता है, कुछ किस्से हैं जिनके अंत आज तक समझ नहीं पाती..क्या हर भाव को सिर्फ एक ही कसौटी पर कसा जा सकता है ? क्यों इतनी स्वच्छंदता मानव स्वभाव में नहीं है कि बिना न्यायोचित ठहराए,बिना सही-गलत का मूल्यांकन किए हम हृदय में उमड़ते भावों … Read more

दुर्गा पूजा:आत्मबल जागरण का माध्यम

योगेन्द्र प्रसाद मिश्र (जे.पी. मिश्र)पटना (बिहार)************************************************** दुर्गा पूजा की धूम मची है। घर-घर में दुर्गा-सप्तशती का पाठ हो रहा है। जो लोग घर में हैं तो वो इस अनुष्ठान को सफल करने में लगे हुए हैं और जो घर से बाहर हैं,वे भी कष्ट सह कर, ‘कोरोना’ महामारी के भय को भी त्याग कर दूर … Read more

स्वार्थ से दूर रखना चाहिए जीवन

इंदु भूषण बाली ‘परवाज़ मनावरी’ज्यौड़ियां(जम्मू कश्मीर) ******************************************************* हाँ,हमें अपना जीवन स्वार्थ से दूर रखना चाहिए। यही हमारे धर्मग्रंथों की शिक्षा भी है कि,दूसरों के प्रति नि:स्वार्थ सेवा भाव रखना चाहिए। जिसे जीवन का मूलमंत्र भी कहते हैं। चूंकि,सेवा भाव से विनम्रता एवं सहनशीलता का गुण फलता-फूलता है और जिस व्यक्ति के मन में ममता,करुणा की … Read more

वक्त का फेर

मीरा जैनउज्जैन(मध्यप्रदेश) ************************************************ जलते हुए रावण को देख करीब वृक्ष पर बैठी चिड़िया ने प्रश्न किया-‘रावण दादा! पहले तुमने स्वयं गलती की थी और राम जैसे भगवान से खूब युद्ध किया,किंतु आज बिना किसी विरोध के चुपचाप जल जाते हो,ऐसा क्यों ?’इस पर रावण ने अपनी व्यथा कुछ यूँ प्रगट की-‘चिड़िया रानी! मैं तुम्हें क्या … Read more

जनहित में धर्ममय राजनीति महती आवश्यक

अमल श्रीवास्तव बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** ‘राजनीति’ एक ऐसा क्षेत्र है,जो‌ समाज को प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष सर्वाधिक प्रभावित करता है। ऐसी स्थिति में यदि राजनीति की दिशा और दशा सही नहीं होगी तो समाज को भारी क्षति पहुँचेगी। इस कारण धर्मतंत्र को चाहिए कि वह ‘राजनीति’ पर नजर रखे तथा उसके भटकाव को रोके। उसका मार्गदर्शन करे,जन-जागरण करे, … Read more

रावण का पुतला तो फूंक दिया,राक्षसी वृति को कौन फूंकेगा

डॉ.प्रभात कुमार सिंघलकोटा(राजस्थान)************************************ विजया दशमी विशेष…………. सदियों से हम बुराई और राक्षसी वृति के प्रतीक रावण के पुतले का कभी वध कर कभी फूंक कर बुराई का अंत कर दशहरा मनाते आ रहे हैं। रावण का पुतला फूंकना तो बुराई के अंत का प्रतीक मात्र है। दिन-ब-दिन समाज में सुरसा के मुँह की तरह बढ़ … Read more