ख्वाब
आशुतोष कुमार झा’आशुतोष’ पटना(बिहार) **************************************************************************** झूठे ख्वाबों को कोस रहा, अपने मंसूबों को रोक रहा। देखता रोज ही ख्वाब वो, अकेला कर रहा राज वो। अंधेरे का है मालिक वो, उजाले का देखता ख्वाब वो। बचपन से करता आया संघर्ष वो, आज भी कर रहा संघर्ष वो। बूझते दीपक की लौ की भाँति बुझ रहा, … Read more