तुम बिन सूनी-सूनी गलियाँ
गुलाबचंद एन.पटेल गांधीनगर(गुजरात) ************************************************************************ तुम बिन सूनी-सूनी ये गलियाँ कान्हा, वृंदावन छोड़कर मत जाओ कृष्ण कन्हैया। तुम बिन सूनी-सूनी हैं गलियाँ, नहीं दिख रहा है यहाँ कोई खेलैया। तेरे बिन सूनी-सूनी रुक्मणी राधा, सूख गया है बाग-बगीचा और पौधा। एक बार तुम लौट कर आ जाना, फिर कभी हमें छोड़,कभी मत जाना। यशोदा मैया ने … Read more