प्रेस क्लब में ‘अलकनंदा’ पुस्तक विमोचित,सृजन को सराहा वरिष्ठ साहित्यकारों ने

-अतिथियों ने नवोदित रचनाकारों से अपेक्षा की कि,और भी अच्छा लिखें, -हिंदीभाषा डॉट कॉम के विशिष्ट सहयोग से निकला सुंदर काव्य संग्रह लखनऊ। साहित्य के गढ़ उत्तर प्रदेश के नवाबी शहर लखनऊ स्थित प्रेस क्लब में प्रधान सम्पादक सी.एस. ‘कृष्णा’ रचित ‘अलकनंदा’ एवं डॉ.जे.एल.पी.राजू रचित ‘निरीह शब्दों का छूटता सिरा’ काव्य संग्रह का विमोचन बड़ी … Read more

हम सर पे कफन बांध कर चले

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** हम सर पै कफन बांध कर चले, आज देश है पुकारता। दुश्मनों को है ललकारता। साथियों चलो संवर के आज, माटी की सौगंध ले चले॥ इस देश से आतंक मिटाना, दुश्मनों को मार भगाना। जी-जान से इस देश की रक्षा, करने को प्राण हाथ ले चले॥ देश का झंडा चूमे … Read more

चड्डी का ग्लोबल होना

अरुण अर्णव खरे  भोपाल (मध्यप्रदेश) *********************************************************************** पूरे देश में इस समय शायद मैं सबसे ज्यादा खुशी का अनुभव कर रहा हूँ,जबसे मैंने पढ़ा है कि,चड्डीशब्द को ऑक्सफ़ोर्ड ने अपनी डिक्शनरी में शामिल कर लिया है मेरी खुशी का पारावार नहीं है। अब मुझे चड्डी बोलने में शर्म नहीं आएगी। मैं सबके सामने,ब्राण्डेड शो-रूम में,बड़े-बड़े माल … Read more

बिना नीड़ के बया बिचारी

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* कटे पेड़ के ठूँठ विराजी, बया मनुज को कोस रही। बेघर होकर,बच्चे अपने, संगी-साथी खोज रही। मोह-प्रीत के बंधन उलझे, जीवन हुआ क्लेश में। जैसा भी है,अपना है यह, रहना पंछी देश मेंll हुआ आज क्या बदल गया क्यों, कुटुम-कबीला नीड़ कहाँ। प्रातः छोड़ा था बच्चों को, सब ही थे खुशहाल … Read more

मत ये सजा दीजिए।

डॉ.अमर ‘पंकज’ दिल्ली ******************************************************************************* मुद्दतों जो छिपाया,बता दीजिए, आग जिस्मो-ज़िगर की बुझा दीजिए। हमनशीं रूठकर दिल जलाती रही, पास उनको कोई फिर बुला दीजिए। गैर का दिल बसेरा बना आपका, प्यार की मेरे मत ये सजा दीजिए। आपको गैर की बज़्म भाने लगी, मेरी क्या अब जगह है जता दीजिए। ख़्वाब तो ख़्वाब हैं,टूटते हैं … Read more

दर्शकों की बड़ी जिज्ञासा होती है पुनर्जन्म वाली फिल्मों में

इदरीस खत्री इंदौर(मध्यप्रदेश) ******************************************************* दोस्तों,भारत में फ़िल्म बनाने के विषयों में एक विषय पुनर्जन्म भी रोचक रहा है,क्योंकि इस विषय में दर्शकों की बड़ी जिज्ञासा होती हैl एक किरदार की पिछली ज़िन्दगी से वर्तमान ज़िन्दगी को जोड़ना और फिर उस इंसान को पिछले जन्म का याद आना,उसके बाद पिछले जीवन के अधूरे काम जिसके कारण … Read more

तारकेश्वर:गरीबों का अमरनाथ

तारकेश कुमार ओझा खड़गपुर(प. बंगाल ) ********************************************************** पांच,दस,पंद्रह या इससे भी ज्यादा…। हर साल श्रावण मास की शुरूआत के साथ ही मेरे जेहन में यह सवाल सहजता से कौंधने लगता है। संख्या का सवाल श्रावण में कंधे पर कावड़ लेकर अब तक की गई मेरी तारकेश्वर की पैदल यात्रा को लेकर होता है। आज भी … Read more

भारतमाता

नवीन कुमार साह समस्तीपुर (बिहार) ************************************************************************************ आज विद्यालय आते ही शोभना की नजरें १५ अगस्त की प्रभारी मैडम कलावती को ढूँढ रही थीl मैडम कलावती भी शोभना से नजरें चुरा रही थी,जैसे उनकी कोई गलती पकड़ ली गई हो। मध्यांतर के बाद आखिर शोभना को मैडम मिल ही गई। उसने बिना देर किए पूछ लिया,-“मैडम … Read more

सबकी कर्मठ दादी

रेणु झा ‘रेणुका’ राँची(झारखंड) ******************************************************************* बचपन से देखा मैंने उस दादी को,वह सभी की दादी थी। हम उन्हें दादी कहते हैं,पापाजी भी दादी कहते हैं। यानी बच्चे,बड़े सभी की दादी। मेहता चाचा ने तो उन्हें सदाबहार, अन्तरराष्ट्रीय दादी की उपाधि दे दी थी। दादी मोहक व्यक्तित्व की धनी और ऊर्जा से सराबोर थी। उनका बस … Read more

मोहब्बत का समंदर बन जाऊँगा

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** इन यादों के संग मैं मोहब्बत का सफर बन जाऊँगा, निगाहें देखी जिसको भी मैं तो वो नजर बन जाऊँगा। चलना है जिंदगी के सफर में एक रोज सुबह से शाम, जहाँ-जहाँ बस्ती बस जाएगी,मैं वो घर बन जाऊँगा। पता नहीं जिंदगी की गाड़ी किस मोड़ पर कहाँ चलेगी, छोड़ कर … Read more