हिंदी रचनाकर्म से इस ‘तलाक’ के आखिर क्या मायने ?

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************************************** क्या‍ हिंदी अब सृजन की,मनोभावों को अभिव्यक्त करने की और अपने समय से जूझने की भाषा नहीं रह गई है ? आज इसमें जो लिखा जा रहा है वह सब ‘हिंदू-मुसलमान, जय श्री राम और वंदे मातरम्’ पर जाकर खत्म हो रहा है ? ऐसी स्थिति में कोई संवेदनशील ‍कवि या … Read more

नयी ऊर्जा का संचार करती है `दोस्ती`

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* अन्तर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस-४ अगस्त विशेष…… अंतर्राष्ट्रीय मित्रता दिवस हर वर्ष अगस्त माह के पहले रविवार को मनाया जाता है। इस दिवस का विचार पहली बार २० जुलाई १९५८ को डॉ. रामन आर्टिमियो ब्रैको द्वारा प्रस्तावित किया गया था। यह दिवस जाति,रंग या धर्म के बावजूद सभी मनुष्यों के बीच दोस्ती और … Read more

दौर

नेहा लिम्बोदिया इंदौर(मध्यप्रदेश) ********************************************************** दौर-दौर की बात अलग है, दौर-दौर के रंग निराले। दौर-दौर के ठाट अनूठे, दौर-दौर की फ़िज़ा अलबेली। दौर-दौर के रूप अनोखे, दौर-दौर से चलती दुनिया। दौर-दौर का अपना मजा है, दौर-दौर को जी लो यारों। करो कर्म-परिश्रम जमकर तुम, दौर-दौर को अपना बना लोll

नापाकी तज स्वार्थ मन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** झूठ कपट कलि अस्त्र से,हारा अब परमार्थ। राष्ट्रद्रोह फन तान कर,राजनीति डस स्वार्थll वतन परस्ती में फ़िदा,देते जान जवान। बन प्रबुद्ध द्रोही वतन,घूम रहे शैतानll लानत है उस जिंदगी,रह खाते जिस देश। देश तोड़ने में लगे,दे नफ़रत संदेशll लाभ उठा मासूमियत,दीन-दुखी इन्सान। जाति धर्म भाषा विविध,लड़ा रहे शैतानll … Read more

सफलता

मोनिका शर्मा मुंबई(महाराष्ट्र) ***************************************************************** सरस्वती विद्यालय में रुक्मिणी जी का आगमन एक हिन्दी शिक्षिका के रूप में हुआ। वह छठी कक्षा को हिन्दी पढ़ाती। पहले कुछ दिनों में उन्होंने बच्चों से बातचीत कर उन्हें जाना और हर एक बच्चे को परख लिया। कक्षा के सभी बच्चे पढ़ाई में अव्वल एवं खेलकूद में भी अच्छे थे,परंतु … Read more

जल छोड़ो बादल

प्रदीप कान्त इन्दौर (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* ख़ुद को ज़रा निचोड़ो बादल, धरती पर जल छोड़ो बादल। सावन जैसा सावन तो हो, गर्व तपन का तोड़ो बादल। प्यासी नदिया पास बुलाती, ऐसे ना मुँह मोड़ो बादल। आज ज़रूरत ज़्यादा है कुछ, जल में जल को जोड़ो बादल। जम-जम बरसो,थम-थम बरसो, सूखा छोड़ न दौड़ो बादल॥

लोकतंत्र में गिरने-गिराने की परम्परा

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** जैसे पीने-पिलाने वालों के मजे होते हैं,वैसे ही राजनीति में गिरने-गिराने के मजे होते हैं। राजनीति में गिराने वाला और गिरने वाला दोनों ही महान माने जाते हैं। राजनीति में आदमी गिरने से पहले पुरजोर कोशिश करता है कि वो किसी को गिरा दे और गिरे नहीं,राजनीति में तो एक-दूसरे … Read more

सर्वव्यापी भ्रष्टाचार

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** सब कहते हैं बचकर रहना, बहकावे में कभी ना बहना जनता हो चाहे सरकार, सर्वव्यापी है भ्रष्टाचार। सुनी है मैंने कथा-कहानी, भगवन रूप जैसे है पानी प्रेम से हो जाता साकार, सर्वव्यापी है भ्रष्टाचार। भ्रष्टाचार अब रूप ईश का, बने काम ना बिना रिश्वत की फीस का नेता करें सब … Read more

मेरा रफ़ीक

दृष्टि भानुशाली नवी मुंबई(महाराष्ट्र)  **************************************************************** हयात की एक ह़कीकत सुनो, मसरूफ़ हैं सब अपनी जिंदगी में। हसीन लम्हों में सब होंगे साथ, अलविदा कहेंगे वक्त-ए-गर्दिशों में। गर्दिश वक्त में एहसास हुआ, कोई भी मेरे साथ न था। तब कल्ब ने दिया दिलासा कि, मेरा रफ़ीक,मेरा आशना, मेरा हमदम मेरे साथ था॥ साथ था केवल उस … Read more

इस देश न आना लाडो

दिप्तेश तिवारी दिप रेवा (मध्यप्रदेश) **************************************************** नव पल्लवित कोमल कली अभी खिली नहीं थी क्यारी में, उजास अभी हुआ नहीं था,कुचक्र रचा अंधियारी ने। माली बस कर ममता से रोप रहा था पौधों को, तभी न जाने किस दानव ने रौंद दिया घरौंदों को। खुशियों से भरी हुई थी संसार समाया देखूंगी, खेल-कूद मस्ती और सतरंगी … Read more