भारतीय किसान की परिस्थिति आज भी खराब
अल्पा मेहता ‘एक एहसास’राजकोट (गुजरात)*************************************** ‘बोए जो बीज खून-पसीना बहा के,आँखों से क्यू फिर आँसूओं की धारा बहती हैमिट्टी को सोना बनाते-बनाते,खुद क्यूँ मिट्टी में मिल जाते हैं।चूल्हा जलाने माचिस की तीली तो मिलती है,पर तवे पे सेंकने रोटी क्यूँ आखिर नहीं मिलती है॥’आज लगभग ९५ फीसदी किसान आधिकारिक न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे … Read more