मेला

दीपक शर्मा जौनपुर(उत्तर प्रदेश) ************************************************* मेला आया भाई मेला आया, चाट-पकौड़े का ठेला आया… कितना सुंदर कितना प्यारा, त्योहार बड़ा अलबेला आया। सजी खिलौने की दुकान, एक से बढ़कर एक सामान… रंग-बिरंगे गुब्बारों से, ढक गया है आसमान। सर्कस और मदारी देखो, जोकर और जुआरी देखो… तरह-तरह के झूले देखो, सारी छवि न्यायी-न्यारी देखो। हम … Read more

चाँद इश्क़

एन.एल.एम. त्रिपाठी ‘पीताम्बर’  गोरखपुर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************** चलो चाँद कुछ और बताए, हल्के हवा के झोंके मंद मधुर चाँदनी में हूर नूर का अंदाज़ बताए। चंचल चितवन शोख अदाएं, सावन का वासंती यौवन इन्सा को हुस्न हैसियत बताए। चन्दन बिजली पानी, जैसा चाँद आपका प्यार चलो चाँद इंसा की, खुशियों का चमन बहार बनाए। चाँद शरारत … Read more

गुरु घण्टाल

अरुण कुमार पासवान ग्रेटर नोएडा(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************* भूख कभी ईमान नहीं खाती; ईमान तो इच्छा का शिकार होती है। भूख को तो सिर्फ रोटी चाहिए, रोटी,एक पवित्र आहार जैसे-प्यास के लिए शुद्ध मृदु जल, जैसे-साँस के लिए अप्रदूषित प्राणवायु जैसे-हवन के लिए समिधा। भूख पेट में आती है,पर जब शिकार हो जाती है धूर्त मन का, … Read more

उठो,जागो…

ललित प्रताप सिंह बसंतपुर (उत्तरप्रदेश) ************************************************ उठो,जागो…, फिर से नयी शुरूवात करोl खत्म हो गये हैं जो रिश्ते, उनसे फिर शुरू बात करो अगर जो मानें तो बेहतर, नहीं फिर दरकिनार करोl उठो,जागो… बहुत लोग मिलेंगे जीवन में, उनके बारे में सब ज्ञात करो लगे जो भी मृदुभाषी तुमको, उन्हीं का बस चुनाव करोl उठो,जागो… … Read more

मेरी कल्पना…

विनोद सोनगीर ‘कवि विनोद’ इन्दौर(मध्यप्रदेश) *************************************************************** महक हो ऐसी, सागर में लहरें हो जैसी। सादगी हो ऐसी, दिल में उमंगें हो जैसी। सूरत हो ऐसी, फूलों में कोमलता हो जैसी। आँखें हों ऐसी, सागर में गहराई हो जैसी। जुल्फें हों ऐसी, सावन की घटाएं हों जैसी। मुस्कुराहट हो ऐसी, मोतियों की चमक हो जैसी। चंचलता … Read more

दिनकर

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* दिनकर दिनकर से हुए,हिन्दी हिन्द प्रकाश। तेज सूर जैसा रहा,तुलसी सा आभास॥ जन्म सिमरिया में लिये,सबसे बड़े प्रदेश। सूरज सम फैला किरण,छाए भारत देश॥ भूषण सा साहित्य ध्रुव,प्रेमचंद्र सा धीर। आजादी के हित लड़े,दिनकर कलम कबीर॥ भारत के गौरव बने,हिन्दी के सरताज। बने हिन्द के राष्ट्रकवि,हम कवि करते नाज॥ आजादी के … Read more

गुलाब

सपना परिहार नागदा(मध्यप्रदेश) ******************************************– सुना है तेरे शहर में गुलाब बहुत हैं, उसकी खुशबू मेरे शहर से होकर गुजरती है भले ही रौनक तेरे शहर में हो, तेरे शहर के गुलाब से मेरी गलियाँ महकती है। गुलाब है तो चमन में बहार है, हर लब पर सिर्फ उसका ज़िक्र बेशुमार है वो जब खुल के … Read more

गुलाब ले लो

सविता सिंह दास सवि तेजपुर(असम) ************************************************************************* सिग्नल की हर गाड़ी की खिड़की पर देती है वो दस्तक, शोर चाहे कितना भी हो ट्रैफिक का सबके कानों में चुभती, उसकी वो टक-टकl मटमैली-सी है उसकी फ्रॉक, बाल बिखरे,कहीं पर टूटी क्लिप को संभाले हुए, नज़र आती है वो हर रोज़ सड़क पर हाथों में गुलाब का गुलदस्ता … Read more

यादें

संजय वर्मा ‘दृष्टि’  मनावर(मध्यप्रदेश) ********************************************************************************** गुजर गए अपनों की, स्मृतियों को याद करके सोचता हूँ,कितना सूनापन है उनके बिनाl घर की उनकी संजोई हर चीज को जब छूता हूँ, तब उनकी जीवंतता का अहसास होने लगता, डबडबाई आँखों,भरे मन से एलबम के पन्ने उलटता, तब जीवन में उनके संग होने का आभास होता हैl उनकी … Read more

व्यर्थ न बहाओ पानी,ओ रे सजन….

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* जल शक्ति,जन शक्ति, व्यर्थ न बहाओ पानी,ओ रे सजनl पानी से ही जीवन बने सुंदर वन, जन्म हुआ पृथ्वी का ताप ही ताप था बरसों बरसाया पानी,मिटी हृदय की जलन, व्यर्थ न बहाओ पानी ओ रे सजन…। ताप और जल का ही रूप है इंसा, जल न बरसता,जीवन … Read more