बेटी हूँ तो क्या हुआ…

ममता बैरागी धार(मध्यप्रदेश) ****************************************************************** और मैं जी गई, खुशियां ढेरों मुझसे समाई गमों से दूर हो आई। अपने मुकद्दर को खुद मैं लिखती आई, और मैं जी गई। मुसीबत में ना घबराई, तनिक भी ना अकुलाई। सारे जमाने के अंदर, कली बन कर मुस्कुराई और मैं जी गई। लता कोमल बनकर आई, सहारे से तन … Read more

माँ

दुर्गेश राव ‘विहंगम’  इंदौर(मध्यप्रदेश) ************************************************** अमर प्यार है माँ का जग में,माँ ही सच्चा मीत, सेवा करता है जो माँ की,होती उसकी जीत। नहीं हारता है वह जग में,माँ हो जिसके पास, हर लेती है माँ सदैव दुःख,देती सुख-सा शीतll परिचय-दुर्गेश राव का साहित्यिक उपनाम ‘विहंगम’ है।१९९३ में ५ जुलाई को मनासा (जिला नीमच, मध्यप्रदेश) … Read more

जीवन

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* उदास क्यों हो ? क्यों ठंडी आहें भरते हो ? निराशा ने क्यों, तुमको पकड़ा है ? मजबूरियों ने क्यों, तुमको जकड़ा है ? वक़्त से नाराज़ क्यों ? तक़दीर से, शिकायत कैसी ? निकल कर एक बार तो देखो, अपने ही बनाये दायरे से। फिज़ाओं की ठंडी हवा की … Read more

काली अंधेरी रात…

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ काली अंधेरी रात, सुनसान ज़िंदगी। कटती नहीं है काटे से, वीरान जिंदगी। पत्थर दिल लोग यहाँ, सुनता नहीं कोई। मचा है हाहाकार यहाँ, परेशान जिंदगी। चारों तरफ़ छाया है, मौत-सा सन्नाटा। क्यों नहीं होती सब पे, मेहरबान जिंदगी॥ परिचय-निर्मल कुमार जैन का साहित्यिक उपनाम ‘नीर’ है। आपकी जन्म … Read more

कैसे आता मुझे हुनर

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** कैसे आता मुझे हुनर वो सिखाने का मुझे इल्म है तो केवल गुनगुनाने का, मेरे दिल की बात दिल में ही रही सदा क्या फायदा होता किसी को बताने का। मेरे जिगर पर हुए कई जख्म तो देखो यह सिला है इस कदर तेरे सताने का, मेरी रुह तक को … Read more

हर संघर्ष से पहले एक संघर्ष

रणदीप याज्ञिक ‘रण’  उरई(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************** जब दिखता विशाल कोहरा नदी के उस पार, तब लकड़ी,गठ्ठे पर चलानी पड़ती आरी की धार… तब जाकर मेहनत पसीने से बनती नौका विशालl जब वह निर्मित नौका उतरती नदी की धार तब-तब चलानी पड़ती चप्पू पतवार हर बार, जैसे-जैसे नौका नदी की धार चीरती जाती है तब उस विशाल … Read more

जग को पाठ पढ़ायेंगे

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** यशोधरा का प्रश्न ……….. खुद को दुनिया में बतलाना शुद्ध, आसान बहुत है बन जाना बुध्द। किसी की शवयात्रा को देखकर, एक रात आधी रात को छोड़कर। गहरी नींद में सोयी पत्नी और दुधमुँहे बच्चे से यूँ मुँह मोड़कर। गृहस्थ जीवन से होकर विमुख, आसान बहुत है बन जाना … Read more

बापू का सपना

मनोरमा जोशी ‘मनु’  इंदौर(मध्यप्रदेश)  **************************************************** गाँधी जयंती विशेष…….. आओ मिलकर करें संकल्प, राम राज्य फिर लाएंगे बापू के जो स्वप्न अधूरे, हम साकार बनाएंगे। गाँव बनें सब राज दुलारे, चमकें जैसे नभ के तारे लड़े न झगड़ें आपस में हम, भेद-भाव सब ढहाएंगें। छुआ-छूत न भेद-भाव हो, जनमन के मन प्रेम भाव हो स्नेह सने … Read more

पानी है अनमोल

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ******************************************** पानी है अनमोल, समझो इसका मोल। जो अभी न समझोगे, तो सिर्फ पानी नाम सुनोगे। आने वाले वर्षों में, पानी बनेगा एक समस्या। देख रहे हो जो भी तुम, अंश मात्रा है विनाश का। जो दे रहा तुमको संकेत, जागो जागो सब प्यारे। करो बचत पानी की तुम, बूंद-बूंद पानी की … Read more

युग प्रेरक ग्रंथ है `महात्मायन` और `राष्ट्रमाता कस्तूरबा`

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** महात्मा गांधी के व्यक्तित्व,कृतित्व और अवदान पर आज भी लेखकों की लेखनी रूकी नहीं है,कवियों और वक्ताओं की वाणी थमी नहीं है। कर्मनिष्ठा,भावनिष्ठा और त्यागनिष्ठा को चरितार्थ कर गांधी ने एक ऐसी बडी लकीर खींची है जिसे अभी तक छोटी नहीं किया जा सका है। गांधी की कथनी और करनी … Read more