बेटी हूँ तो क्या हुआ…
ममता बैरागी धार(मध्यप्रदेश) ****************************************************************** और मैं जी गई, खुशियां ढेरों मुझसे समाई गमों से दूर हो आई। अपने मुकद्दर को खुद मैं लिखती आई, और मैं जी गई। मुसीबत में ना घबराई, तनिक भी ना अकुलाई। सारे जमाने के अंदर, कली बन कर मुस्कुराई और मैं जी गई। लता कोमल बनकर आई, सहारे से तन … Read more