अमूल्य

सुशांत सुप्रिय  ग़ाज़ियाबाद (उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** पैर छूते ही माँ ने दिया है आशीष, जैसे आकाश ने दे दिया है क़ीमती इन्द्रधनुष, जैसे पेड़ों ने दे दिए हैं पके हुए फल, जैसे गृहिणी ने अनाज से भर दी है भिक्षु की ख़ाली झोली, जैसे चैन की नींद ने दे दी है थके मज़दूर को राहत l … Read more

प्रकृति

तृप्ति तोमर `तृष्णा` भोपाल (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* कई रूप,कई मौसम,सराबोर है प्रकृति, अनेक रंग-बिरंगी,लिए आकर्षक आकृति। झरने,नदियों,पहाड़ों से मिलकर बना अस्तित्व, महकती हवाएं,खुली फिजाओं से सजा व्यक्तित्व। मनमोहक रुप,सुंदर सलोनी काया, मानो सौंदर्य की देवी की प्रतिछाया। हरी-हरी घास मनमुग्ध कर देने वाली नन्हीं कली, लगता है ऐसे,जैसे पृथ्वी को आँचल में लिए हरियाली। पृथ्वी तल से … Read more

कागज से रिश्ता

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** कैसा रिश्ता है कागज का, हमारे दिल से सारी अनुभूतियों को सारे जज्बातों को अपने दिल में, अथाह जगह दे देता है। तभी तो हम अपनी, भावनाओं को उसके सीने में उतार देते हैं वो उफ़ नहीं करता हैं। समेट लेता है अपने साये में, कितना गहरा रिश्ता है कागज का … Read more

मन ही मन मैं रो रहा

गोलू सिंह रोहतास(बिहार) ************************************************************** यह वासना का दलदल है, यह काया का मायाजाल है सुंदर चेहरे के पीछे बिछ रहा अब जंजाल है, अब हर तरफ बातें नहीं,बातों में वेश्यावृत्ति है भविष्य इसका उज्जवल है,घर-घर में यह कुरुति है, किस रिश्ते को लिखूं विस्तार कर शर्मशार खुद मैं हो रहा… ऐसी हालत देख माधव मन … Read more

रोला छंद विधान

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* साहित्य की पाठशाला …………. (रचना शिल्प:रोला छंद २४ मात्रिक छंद होता है। विषम चरणों में ११ मात्रा और चरणांत २१ से होता है। सम चरणों में १३ मात्रा और चरणांत २२ से होता है। समचरणांत में २२ का विकल्प:-११२,२११,११११ भी मान्य है। दो,दो सम चरणों में समतुकांत हो।) उदाहरण…. . तिरंगा … Read more

नसीब जग गया है उनका

संजय गुप्ता  ‘देवेश’  उदयपुर(राजस्थान) ******************************************************************** नसीब जब जग गया है उनका बेखौफ हुए इस दुनिया के आगे, खुदा को भी भूल बैठे अब वो सजदे करवाते अपने ही आगे। वक्त के फेर थे उनकी किस्मत में या दुनियादारी समझ आयी उनको, भूले हैं सभी के सारे एहसानों को खाक भी नसीब में नहीं थी जिनको। … Read more

कोई अपना-सा हो दूर कहीं

अंतुलता वर्मा ‘अन्नू’  भोपाल (मध्यप्रदेश) ************************************************************ बस यूँ ही,जी करता है, कोई अपना-सा हो,दूर कहीं जो बंधा हो दिल की डोर से, जिसका न कोई छोर हो, बस एक मजबूत डोर हो…l जिसके दूर होने पर भी, मेरे चेहरे पर नूर हो जब उसका कहीं जिक्र हो, और धड़कनें तेज़ हों शोर भी संगीत लगे, … Read more

अंतरिक्ष है शान

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** सबसे आगे दौड़ में,हो नित धावक श्रान्त। शुरु मन्द धावन पथी,नित विजयी बन कान्तll हार-जीत संघर्ष नित,यात्रा जीवन राह। डटे रहे जो विघ्न पथ,अंत सफल हो चाहll चाह सतत नर आलसी,सोच विरत युवजोश। सीख बिना यायावरित,मद में हो बेहोशll रनिवासर इसरो जहाँ,तत्पर अनुसंधान। कहो न नवसिखुआ उसे,पहुँचा मंगलयानll … Read more

पुस्तक..

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ जीवन सार- पुस्तकों में छिपा है, सुखी संसारl बड़ों का मान- पुस्तकें सिखाती है, हमें सद्ज्ञानl राह बताती- किताबें हमें सच्चा, पाठ पढ़ातीl जग विचित्र- अनजान राहों में, पुस्तक मित्रl देती संस्कार- सभी पर लुटाती, पुस्तकें प्यारl परिचय-निर्मल कुमार जैन का साहित्यिक उपनाम ‘नीर’ है। आपकी जन्म तिथि … Read more

मुहब्बत सोचने वालों के बस की बात ना होती

अमितू भारद्वाज शिकोहपुर (उत्तरप्रदेश) ******************************************************************************** मुहब्बत सोचने वालों के,बस की बात ना होती, ये आँखें सूख जाती तो,कोई बरसात ना होती। ना आते तुम ख्वाबों में,अगर चितचोर के जैसे, उड़ी होती पतंग मन की,बता बिन डोर के कैसेl मेरी नदियों का सागर बन सहारा हो गया होता, जो मेरे पास है सारा,तुम्हारा हो गया होताl … Read more