अलकनंदा

तृप्ति तोमर  भोपाल (मध्यप्रदेश) ********************************************************************* नील रंग लिए बहती अलकनंदा, जैसे खुले आकाश में पंख फैलाने कोई परिंदा। भागीरथी संग मिल बना पवित्र संगम, असंख्य श्रद्धालुओं का होता समागम। अलकनंदा पावन धरती पर पावन नदी का महातम, अनेक पवित्र नदियों का यहां से होता उदगम। यहाँ कई लोगों का जुड़ा है विश्वास, जहां जाने से … Read more

बताओ,अब किधर जाऊँ मैं

कैलाश झा ‘किंकर’ खगड़िया (बिहार) ************************************************************************************ बताओ तुम्हीं अब किधर जाऊँ मैं, चलूँ साथ मंदिर कि घर जाऊँ मैं। गुलाबी हँसी के महाजाल में, कहीं टूटकर ना बिखर जाऊँ मैं। कभी तेरे घर को भी देखूँगा ही, तुम्हारे शहर को अगर जाऊँ मैं। नज़र फेर लेना नहीं तुम कभी, अगर सामने से गुज़र जाऊँ मैं। … Read more

शुचिता की परिभाषा

ओम अग्रवाल ‘बबुआ’ मुंबई(महाराष्ट्र) ****************************************************************** आओ गीत सुनाऊँ तुमको, ‘शुचिता की परिभाषा’ का, मनभावों में पलता है उस,जीवन की अभिलाषा का। इन नयनों में नेह-स्नेह की,बहती निर्मल धारा हो, दीन-दु:खी की पीड़ा का भी,सच्चा दर्द हमारा हो। दया धर्म का भाव हमारे,जीवन का आधार रहे, खुशियों से परिपूरित अपना,सारा ही संसार रहे। हर भूखे को … Read more

नहीं शर्मसार करो

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’ कानपुर(उत्तर प्रदेश) ***************************************************** रोज़ उसको न बार-बार करो। जो करो काम आर-पार करो। आ के बैठो गरीबखाने में, मेरी दुनिया को मुश्कबार करो। तेरे बिन है खिजाँ-खिजाँ मौसम, आ के मौसम को खुशगवार करो। जब तुझे मिल गया सनम याराँ, अब न आँखों को अश्कबार करो। माँग ली है ‘हमीद’ … Read more

गुलशन

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** महका-महका वो ये गुलशन है। जहाँ फूल खिल जायें वो मन है। जहाँ फूल खिलते खुशबू आती, मेरा दिल का आंगन उपवन है। गंध की फिजाओं में बहार है। प्यार की इस गुलशन में धार है। इस प्रेम की वर्षा से महकता, जीवन सबका आज हर बार है। रिश्तों का प्यारा … Read more

माता-पिता और गुरु

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ माता-पिता ने पैदा किया,पर दिया गुरु ने ज्ञान, लाड़-प्यार दिया दादा-दादी ने। पर गुरु ने दिया अच्छे बुरा का ज्ञान, उठे हृदय में जब भी विकार। तब उन्हें गुरु ने कर दिया शांत, तभी तो कहता हूँ मैं कि आचार्यश्री हैं इस युग के भगवान। गुरु ही साँस और गुरु ही … Read more

स्त्री

गरिमा पंत  लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ********************************************************************** मैं स्त्री हूँ, इसलिए हर सुख-दु:ख सहती हूँ भगवान ने मुझे सहनशील बनाया है, इसलिए सबकी डांट सुनती हूँ क्योंकि,मैं स्त्री हूँ। मुझसे सारी अपेक्षाएं रखी जाती है, जिसे पूरा करना मेरा फर्ज है अगर कोई गलती कर दूं तो, मुझे उलाहना मिलता है क्योंकि,मैं स्त्री हूँ। कोई तकलीफ घर पर … Read more

हाय हाय रे गर्मी…

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** हाय हाय रे गर्मी, हाय हाय रे गर्मी, जल बिन जन-जीवन तड़पे… मानसून ने ठानी बेहद बेशर्मी, हाय हाय रे गर्मी,हाय हाय रे गर्मी। वरुण देव नाराज़ चल रहे, बादल बिन जल के मचल रहे… मौसम में न आती नरमी, हाय हाय रे गर्मी,हाय हाय रे गर्मी। यह माह जेठ … Read more

मालूम नहीं,दौड़े जा रहे हैं लोग

तारा प्रजापत ‘प्रीत’ रातानाड़ा(राजस्थान)  ************************************************* (रचनाशिल्प:२१२ १२१ २१२ १२१) कुत्ते की क़दर,आदमी बेक़दर देखा, सबकी ख़बर,ख़ुद को बेख़बर देखा। बेवफ़ा हवाओं ने अपना रुख़ बदला, मौसम-ए-बहार में सूखा शज़र देखा। मालूम नहीं कहाँ,दौड़े जा रहे हैं लोग, बगैर मंजिल का हमने ये सफ़र देखा। तेरे पत्थर से दिल में,मोहब्बत भर दी, अपनी दुआओं का हमने … Read more

…तो समझ लेना

सारिका त्रिपाठी लखनऊ(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* जब मेरी नज़्में खामोश हो जाएं, जब पुकारना बंद कर दें तुम्हें तो समझ लेना, सो गई हूँ तनहाइयां ओढ़कर, तुम्हारी परछाइयां ओढ़कर…। जब कभी अचानक ही मन बहुत बेचैन हो जाए, तो समझ लेना… कि चली गई हूँ,अपनी बेचैनियां छोड़ कर…। कभी बात-बात पर जो नयन छलक जाएं, तो समझ … Read more