भाषा के बदलते रूप

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* भाषा के बदलते रूप कई हैं-मसलन् राजनीतिक विचार में भाषा के अपने शब्द-अर्थ हैं, सामाजिक विचारों में उससे भिन्न शब्दार्थ होते हैं। अर्थ, धर्म व दार्शनिक चिंतन में विचारों के अपने सुगठित भाषायी शब्दार्थ हैं। यानि जिसका जैसा कार्य क्षेत्र, वैसे विचारधारा से जुड़े भाषाजनित शब्दार्थ मौजूद हैं। पाठक व आलोचक … Read more

जीवन-शैली में बदलाव से रहें स्वस्थ

ललित गर्गदिल्ली************************************** यकृत (लिवर) से संबंधित बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए हर साल १९ अप्रैल को ‘विश्व यकृत दिवस’ मनाया जाता है। शरीर के अन्य हिस्सों की तरह यह भी हमें स्वस्थ रखने में काफी अहम भूमिका निभाता है। इसलिए उसका ख्याल रखना भी बेहद आवश्यक है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण … Read more

तनाव

मीरा जैनउज्जैन(मध्यप्रदेश) ************************************************ कोचिंग क्लॉस से सीधी यहां पहुंची रमिता बैग को एक ओर रख नि:संकोच नितिन के कंधे पर लापरवाह-सी हाथ रखती हुई मुदित स्वर में बोली-“देखो-देखो नितिन ! मोर नाच रहा है, साथ में पक्षी भी चहचहा रहे हैं। चारों ओर हरियाली ही हरियाली, फूलों की महक, बैठने और घूमने की माकूल व्यवस्था, … Read more

नौकरी

डोली शाहहैलाकंदी (असम)************************************** राधा पढ़ाई में शुरू से ही सदा अव्वल रही, लेकिन पिता की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण वह आगे की पढ़ाई जारी रखने में असमर्थ थी, पर राधा आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए कटिबद्ध थी। इसलिए विपरीत परिस्थिति में भी उसने बीए तक की पढ़ाई खुद ट्यूशन पढ़ाकर … Read more

आधुनिकता में दम तोड़ रही सर्कस की उम्मीद

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** सर्कस एक जीवंत कलाकारी प्रदर्शन करने का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान होता है, जिसमें मनोरंजन के साथ कलाकारों की एकाग्रता, अनुशासन एवं आपसी सूझबूझ का प्रदर्शन देखने को मिलता है। इसमें थोड़ी-सी चूक जीवन-मरण में प्राप्त होती है। यह मानव जीवन में बहुत श्रेष्ठ पाठ सीखने का सुन्दर अवसर होता है।आज के आधुनिक युग … Read more

बच्चों के प्रति संवेदनहीन समाज

ललित गर्गदिल्ली************************************** झारखण्ड में १ बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद कथित रूप से साढ़े ४ लाख रुपए में बेचने की शर्मनाक घटना ने संवेदनहीन होते समाज की त्रासदी को उजागर किया है। जहां इस घटना को माँ की संवेदनहीनता और क्रूरता के रूप में देखा जा सकता है, वहीं आजादी के अमृत काल … Read more

पूर्णता का महासागर है ‘दु:ख-सुख’

शशि दीपक कपूरमुंबई (महाराष्ट्र)************************************* ‘अरे! मन समझ-समझ पग धरियो, अरे मन इस जग में नाहिं अपना कोई, परछाईं सो डरिए…।’ राग असावरी पर आधारित यह बंदिश दुखी मन को समझाने के लिए आशा की किरण के समान है।संसारिक चिंतन का विषय है एक शब्द ‘दु:ख’ । क्यों है ? प्रश्न सबके मन को विचलित कर … Read more

राजनीति का अब संस्कृत पर वार

कुछ दिन पहले कॉंग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता जयराम रमेश ने संसद में दिए गए उनके एक भाषण का अंश ट्वीटर पर डाला था। यह वक्तव्य राजभाषाओं के लिए बजट आवंटन हेतु था, जिसमें श्री रमेश ने कहा था कि जहां संस्कृत के लिए सरकार ने ₹६०० करोड़ से अधिक आवंटित किए, वहां कन्नड़, तमिल, मलयालम … Read more

खरीददारी करते समय ध्यान दें

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन(हिमाचल प्रदेश)***************************************************** हम लोग अक्सर खरीददारी करते करने के लिए बाजार जाते हैं। बाजार में बहुत सारी दुकानें होती है। कुछ दुकानों पर बहुत भीड़ रहती है, अर्थात पैर रखने की जगह भी नहीं होती है और कुछ दुकानें ऐसी भी होती है, जहां इक्का-दुक्का ही ग्राहक होते हैं। तब हम लोग … Read more

धार्मिकता के नाम पर हिंसा अनुचित

डॉ.अरविन्द जैनभोपाल(मध्यप्रदेश)***************************************************** दुनिया में धर्म के नाम पर सबसे अधिक हिंसाएं हुई हैं और उसके बाद स्त्रियों के नाम से बहुत युद्ध। जब हम अशिक्षित, अनपढ़, गंवार या आदिमयुगीन थे, तब ये सब कार्य होते थे तो भी मान्य थे, पर जब हम २१वीं शताब्दी में जा रहे हैं, जहाँ ज्ञान-विज्ञान की खुली छूट है, … Read more