भारतीय राजनीति में ‘चरण स्पर्श रोग’

अजय बोकिल भोपाल(मध्यप्रदेश)  ****************************************************************** भारतीय राजनीति और भारतीय मानस का एक लाइलाज लक्षण यह भी है कि जिस काम से बचने को कहा जाए,वही हर हाल में किया जाए। ऐसी ही लाइलाज बीमारियों में से एक है पैर छू संस्कृति। यूँ भारतीय परम्परा में यह बुजुर्गों,श्रेष्ठिजनों,गुरूओं और विद्वानों के प्रति सम्मान करने का प्रतीक है,लेकिन … Read more

आत्मविश्वास की खोज में

मच्छिंद्र भिसे सातारा(महाराष्ट्र) ********************************************************************************** आज कुहसा घना छाया है धरा पर नहीं, दिल,दिमाग और मुझ पर… इस अँधियारी दूब में एक नया पथ ढूंढ रहा हूँ, खुद के अस्तित्व की, नयी पहचान ढूंढ रहा हूँ। मंजिल पाना सुलभ होगा कैसे ? जब पथ पर अपने ही बने, निष्ठूर,क्रूर,कुटिल और ठग-से भाप बन मँडराते हैं, और … Read more

साहित्यकार रिखब चन्द राँका‌ ‘कल्पेश’ को‌ ‘अटल‌ गौरव’ सम्मान

इंदौरl अटल काव्यांजलि साहित्यिक मंच (सतना,मध्यप्रदेश) द्वारा तेरहवें मासिक जन्मोत्सव व नवरात्रि पर्व पर ऑनलाइन काव्य सम्मेलन में साहित्यकार रिखब चन्द राँका ‘कल्पेश'(जयपुर,राजस्थान) द्वारा अपनी भक्तिमय काव्य की शानदार प्रस्तुति दी गई। सम्मान समारोह में मंच के अध्यक्ष व वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. वीरेन्द्र प्रताप सिंह भ्रमर द्वारा श्री राँका ‘कल्पेश’ जयपुर राजस्थान को ‘अटल गौरव’ … Read more

चंद्र,इन्द्र…हम

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* चंद्र इंद्र नभ देव,सदा शुभ पूज्य हमारे। हम पर रहो प्रसन्न,रखो आशीष तुम्हारे। लेकिन मन के भाव,लेखनी सच्चे लिखती। देव दनुज नर सत्य,कमी बेशी जो दिखती। क्षमा सहित द्वय देव,पुरानी बात सुनाऊँ। लिखता रोला छंद,भाव कुछ नये बताऊँ। शर्मा बाबू लाल,सुनी वह तुम्हें सुनाता। बीत गया युग काल,याद फिर से आ … Read more

पानी

हरीश बिष्ट अल्मोड़ा (उत्तराखण्ड) ******************************************************************************** पानी बिन सूखा पड़े,बरसे तो ले डूब। कैसी रचना रच रहा,प्रभु ही जाने खूब॥ प्रभु ही जाने खूब,ईश की महिमा न्यारी। सबके पालन हार,वही है जगत मुरारी॥ कहे कवि हरी सिंह,सभी हैं हम अज्ञानी। दया करो हे नाथ,हुआ सब पानी-पानी॥ पानी ये अनमोल है,देता जीवन दान। व्यर्थ बहाना छोड़ दो,कहना … Read more

धरती का भगवान

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** खेती-बाड़ी जो करे, होता वही किसान। धरती की सेवा करे, धरती का भगवानll धरती का भगवान, सदा ही करे किसानी। रखता इतनी चाह, सुलभ हो दाना पानीll कह डिजेन्द्र करजोरि, कभी जो पीटे छाती। रोये जहाँ किसान, कहाँ हो खेती पातीll परिचय-डीजेंद्र कुर्रे का निवास पीपरभौना बलौदाबाजार(छत्तीसगढ़) में है। … Read more

परमात्मा

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** परमात्मा मन में बसे,देखो आप निहार। पाओगे अंतर हृदय,बैठे वो साकारll सत्य कर्म की राह पर,चलते सबके संग। निराकार साकार भी,इसके अपने रंगll हर प्राणी के उर बसे,शांत चित्त भगवान। कर लो दर्शन आप ही,परमात्मा हो ध्यानll धरती के कण-कण बसे,निराकार गतिमान। जल-थल अम्बर दीप्त है,सरल सौम्य भगवानll … Read more

उनका फोन आया है

उमेशचन्द यादव बलिया (उत्तरप्रदेश)  *************************************************** उनका फोन आया है, वे कह रहे थे आज मुझको करना है कुछ काज, हमें घर पर बुलाया है उनका फोन आया है, उनका फोन आया है। पहले हमें सताते हैं, बाद में प्यार जताते हैं हँसने के लिए उन्होंने, आज एक गीत गाया है उनका फोन आया है, उनका … Read more

हिंसा से बढ़ता सामाजिक अलगाव एवं अकेलापन

ललित गर्ग दिल्ली ******************************************************************* आज देश ही नहीं, दुनिया में हिंसा,युद्ध एवं आक्रामकता का बोलबाला है। जब इस तरह की अमानवीय एवं क्रूर स्थितियां समग्रता से होती है तो उसका समाधान भी समग्रता से ही खोजना पड़ता है। हिंसक परिस्थितियां एवं मानसिकताएं जब प्रबल हैं तो अहिंसा का मूल्य स्वयं बढ़ जाता है। हिंसा किसी … Read more

रत्न चतुर्दश

डॉ.एन.के. सेठी बांदीकुई (राजस्थान) ************************************************************************* (रचना शिल्प:मापनी मुक्त सम मात्रिक छंद है यह। १६,९ मात्रा पर यति अनिवार्य चरणांत २१२, २ चरण सम तुकांत,४ चरण का छंद) मंदराचल को बना मथनी,रस्सी शेष को। देवदनुज सबने मिल करके,मथा नदीश कोll किया अथक प्रयास सभी ने,रहे वहां डटे। कर लिया प्राप्त मधुरामृत जब,सभी तभी हटेll रत्न चतुर्दश … Read more