प्रेम
कृष्ण कुमार कश्यप गरियाबंद (छत्तीसगढ़) ************************************************************************** प्रेम अराधना,प्रेम ही पूजा, प्रेम आत्मा की पुकार है। प्रेम से बड़ा न कोई दूजा, प्रेम तो ईश्वरीय उपहार है। प्रेम कर्म है,प्रेम ही मर्म, प्रेम धर्म का प्राण-सार है। प्रेम गर दिल में हो सबके, तो हर जन एक अवतार है। प्रेम न बिकता बाजारों में, रत्न बड़ा … Read more