प्रेम

कृष्ण कुमार कश्यप गरियाबंद (छत्तीसगढ़) ************************************************************************** प्रेम अराधना,प्रेम ही पूजा, प्रेम आत्मा की पुकार है। प्रेम से बड़ा न कोई दूजा, प्रेम तो ईश्वरीय उपहार है। प्रेम कर्म है,प्रेम ही मर्म, प्रेम धर्म का प्राण-सार है। प्रेम गर दिल में हो सबके, तो हर जन एक अवतार है। प्रेम न बिकता बाजारों में, रत्न बड़ा … Read more

मैं मजदूर हूँ

प्रेमशंकर ‘नूरपुरिया’ मोहाली(पंजाब) **************************************************************************** मैं इस देश का मेहनती मजदूर हूँ, मैं कभी पास अपने,कभी दूर हूँ। हर इमारत की बुनियाद रखता हूँ मैं, फिर भी कुछ कहते हैं मैं मजबूर हूँ॥ मैं प्रगति की इमारत की बुनियाद हूँ, मैं हर मेहनत के सागर की फरियाद हूँ। अपने खून-पसीने से सींचता हूँ मैं इसे, फिर … Read more

ज़िन्दगी का अर्थ

नरेंद्र श्रीवास्तव गाडरवारा( मध्यप्रदेश) ***************************************************************** ज़िन्दगी का अर्थ नहीं, समझने में हम जबसे असमर्थ हैं, जितना भी कमाने में लगे रहो, सब व्यर्थ है क्योंकि, कमाने के चक्कर में खो गये हैं हमारे संगी-साथी,पड़ोसी,हितैषी, हमने कमाने की अंधी दौड़ में इन्हीं को रौंदा है, इसीलिये सूना घरोंदा है, आओ स्वार्थ-दहलीज़ को पार करें, हमारे आसपास … Read more

प्यारा हिंदुस्तान

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** हम हैं प्यारा हिंदुस्तान रखते हैं हम दिल में सारा जहान, मेरे अंदर बसता केवल इंसान ही इंसान नफरत का यहाँ तनिक नाम नहीं, क्रोध-ईर्ष्या का यहाँ काम नहीं स्वार्थ का यहां कोई दाम नहींl हम हैं प्यारा हिंदुस्तान हूँ मैं सुन्दर एक सोने-सी चिड़ियाँ, चाहता भला मैं … Read more

भारत माँ के लाल

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ मिलें अपनों का प्यार हमको, तो सफलता चूमेगी कदम। रहे सभी का अगर साथ, तो जीत जाएंगे हर जंग। और मिल जाएगा हमको, वो खोया हुआ आत्म सम्मान। इसलिए हिल-मिलकर, रहो देशवासियों तुम सबll तुम्हें कसम भारत माँ की, दिखाओ अपना जौहर तुम। तुम्हीं तो कर्णधार हो, अब भारत माँ के … Read more

क्या कसूर रहा…

ममता बैरागी धार(मध्यप्रदेश) ****************************************************************** हर तरफ खुशियां मेरे आस-पास थी, पंखों से उड़ान भर उड़ना चाहती थी क्योंकि मेरे घर-आँगन की मैं राजकुमारी थी। एक तरफ बाबुल का स्नेह,एक तरफ माँ की ममता, और भाई-बहनों के संग में प्यारी-न्यारी थी। आज लग रहा था,आसमां में पहुंच गई हूँ, मैं ऊपर और आसमान नीचे था शायद … Read more

हरेली त्योहार

अर्चना पाठक निरंतर अम्बिकापुर(छत्तीसगढ़) ***************************************************************************** हरियाली का अपभ्रंश है हरेली, छत्तीसगढ़ी प्रकृति पूजते बना सहेली। नांगर,कोपर रापा,कुदारी,चतवार सूजा, कृषि कार्य ही इनकी सर्वोत्तम पूजा। होम धूप दे भोग लगे चीला, हर कृषक रहता यहाँ खिला-खिला। डोंगहार सिंदूर का त्रिशूल बना पूजते नाव, भेलवा और महुआ डाली दरवाजे पर रखते पूरे गाँव। हरेली के दूसरे दिन राउत … Read more

अपने सर पे हम बाँध कर कफन चले

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- हम हैं ऐसे नौजवान कट ही जाए सर भले, आज अपने सर पे हम बाँध कर कफन चले। हम वतन की आबरू मिटने नहीं देंगे कभी, उठी गलत नजर तो आँख फोड़ देंगे हम अभी। जो गला विद्रोह की आवाज गर उठायेगा, बोलने से पहले ही हम काट देंगें … Read more

टूट पड़ो

महेन्द्र देवांगन ‘माटी’ पंडरिया (कवर्धा )छत्तीसगढ़  ************************************************** टूट पड़ो अब बैरी ऊपर,भाग कहीं ना जाने पाय। खाल खींचकर भूसा भर दो,जो भी हमको आँख दिखायll नहीं डरेंगे धमकी से अब,गीदड़ भभकी देना छोड़। आँख उठाकर देखा भी तो,बम का गोला देंगे फोड़ll बड़े-बड़े मिसाइल गोला,रखते हैं हम अपने पास। सीधा-साधा मत समझो तुम,कर देंगे हम … Read more

बेनाम इशारों पर आजादी

रणदीप याज्ञिक ‘रण’  उरई(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************** अब आराम कहाँ, दिमाग जो खुद व्यस्त चौराहा हो चला तभी तो अब शान्त गली भी मन को रिझाती है…l अच्छा लगता है अब, कभी-कभी यूँ ही नीरस रहना क्योंकि सुना है रेगिस्तान की भी अपनी एक पहचान होती है…l कभी-कभी ठहर जाती है निगाहें, टक-टकी लगाये अपरिचित-सी दीवारों पर … Read more