कलियुग की महाभारत

मच्छिंद्र भिसे सातारा(महाराष्ट्र) ********************************************************************************** कृष्ण जन्माष्टमी स्पर्धा विशेष………. सुनो मित्र! कृष्ण हमारे, घोर कलियुग आ गया… द्वापर युग ने फिर एक बार, कलियुग में जनम लिया। देवकी ने दिया कंस को जन्म, पद्मावती ने कृष्ण को पा लिया… मथुरा वृंदावन में तब्दील है, द्वारिका में अनर्गल गिर गया कुंती के सौ पुत्र बने कुटिल, पाकर … Read more

हँसी-ठिठोली कर लें आओ

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** दुनिया के कुछ लोग हमेशा, रहते हैं मुरझाए। हँसी-ठिठोली कर लें आओ, हर कोई मुस्काए॥ बीवी जिसकी कद्दू जैसी, वह ककड़ी का भ्राता। चलना पड़ता साथ कभी तो, पति केवल शरमाता॥ पति मोटा होने की खातिर, खाता रोज दवाई। बीवी दुबराने को मिलों, नाप रही लंबाई॥ अक्सर मुझको दिख … Read more

सावन और बुआजी का आना

सुनील जैन राही पालम गांव(नई दिल्ली) ******************************************************** सावन और बुआजी हर साल आते हैं। सावन के आते ही बच्‍चे खुश हो जाते हैं। सावन की बारिश में नहाने का मजा,पानी में कूद कर लाला जी की धोती को गंदा करने का आनंद और लाला जी का हमारे पीछे-पीछे दौड़ना। मास्‍टरजी साइकल से आते हैं। उनकी पीठ … Read more

चड्डी का ग्लोबल होना

अरुण अर्णव खरे  भोपाल (मध्यप्रदेश) *********************************************************************** पूरे देश में इस समय शायद मैं सबसे ज्यादा खुशी का अनुभव कर रहा हूँ,जबसे मैंने पढ़ा है कि,चड्डीशब्द को ऑक्सफ़ोर्ड ने अपनी डिक्शनरी में शामिल कर लिया है मेरी खुशी का पारावार नहीं है। अब मुझे चड्डी बोलने में शर्म नहीं आएगी। मैं सबके सामने,ब्राण्डेड शो-रूम में,बड़े-बड़े माल … Read more

लोकतंत्र में गिरने-गिराने की परम्परा

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** जैसे पीने-पिलाने वालों के मजे होते हैं,वैसे ही राजनीति में गिरने-गिराने के मजे होते हैं। राजनीति में गिराने वाला और गिरने वाला दोनों ही महान माने जाते हैं। राजनीति में आदमी गिरने से पहले पुरजोर कोशिश करता है कि वो किसी को गिरा दे और गिरे नहीं,राजनीति में तो एक-दूसरे … Read more

‘बारिश-ए-दौरा’

सुनील जैन राही पालम गांव(नई दिल्ली) ******************************************************** ट्रेन का-बारिश का देर से आना और किसान का रोना कोई नई बात नहीं है। बारिश,किसान,कीचड़,जाम,सड़क का बह जाना, आदि-आदि नई बातें नहीं हैं। नई बात तो तब शुरू होती है,जब सरकार नई हो,मंत्री नया हो,मोहल्‍ला नया हो (कच्‍ची कालोनी), रहने वाले नये हों तो समस्‍याएं भी नई … Read more

वास्तु का नया फ़ण्डा

अरुण अर्णव खरे  भोपाल (मध्यप्रदेश) *********************************************************************** पहले लोग जब घर बनाते थे,या खरीदते थे तो उनकी प्राथमिकता होती थी घर में समुचित रोशनी हो,खुला-खुला हो,हवादार हो। बाद में वास्तु के अनुसार घर बनाने और खरीदने की होड़ होने लगी,पर हमारे मित्र पण्डित नरोत्तम देव शर्मा आजकल एक नई समस्या से जूझ रहे हैं,जो उनको वास्तु … Read more

नहीं सुने वो सब गुने

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** सुख से सम्बन्धित बातें तो बहुत सारी की जा सकती हैं,लेकिन कुछ बातें अनुभव की की जाए तो उसका आनंद अलग है। लोग कहते हैं कि आँखों-देखी और कानों-सुनी बात में ज़मीन और आसमान का अंतर आ जाता है,लेकिन आज जो बात है वो अनुभव की बात है। वो ज़मीन … Read more

अथ स्वरुचिभोज प्लेट व्यथा

नरेंद्र श्रीवास्तव गाडरवारा( मध्यप्रदेश) ***************************************************************** सलाद, दही बड़े, रसगुल्ले, जलेबी, पकौड़े, रायता, मटर पनीर, दाल, चावल, रोटी, पूरी के बाद… ज्यों ही मैंने प्लेट में पापड़ रखा, प्लेट से रहा न गया और बोली- अब बस भी करो, थोड़ा सुस्ता लो पहले इतना तो खा लो। घर में तो, एक गिलास पानी के लिये पत्नी … Read more

न घर के रहेंगे,न घाट के…

संदीप सृजन उज्जैन (मध्यप्रदेश)  ****************************************************** “मृत्यु जीवन का शाश्वत सत्य है,जीवन मिट्टी से मिट्टी तक की यात्रा है। अर्थी से पहले जीवन का अर्थ जान लें।“ ये बोध वाक्य हर बार उस समय याद आते हैं,जब हम किसी को श्मशान में छोड़ने जाते हैं और शोकसभा के कक्ष की दीवारों पर अपनी दृष्टि डालते हैं,जहाँ … Read more