भोर

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  *********************************************************************************- उगते हुए आदित्य की लाली को है मेरा नमन, छिपते हुए सूरज ने नभ को लाल लाल कर दिया। किरणें आयी भानु की जादू-सा हरसू हो गया, इस धरा को रोशनी से मालामाल कर दिया। खिल गये उपवन सभी औ खिल उठा सारा चमन, फूलों औ कलियों ने गुलशन … Read more

आओ चलें गाँव की ओर

गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* आओ चलें गाँव की ओर, वो चिड़ियों का चहकना वो कोयल का गाना, वो सुहानी भोरl आओ चलें गाँव की ओर… नित नये ख्बाव सजाते, पीपल नीचे चौपाल लगाते बच्चे सभी अब पढ़ने जाते, खेलें बाल गोपाल,पपीहा मचाये शोरl आओ चलें गाँव की ओर…। अस्पताल नहीं दूर अब,मिले … Read more

जिंदगी तो आज ही है

राज कुमार चंद्रा ‘राज’ जान्जगीर चाम्पा(छत्तीसगढ़) *************************************************************************** जैसे आज गुजरा है कल भी गुजर जाएगा, वर्षों से जिस पल का इंतजार था आएगा… और वो पल भी गुजर जाएगा। कल की आस में आज को क्यों गवांए, मन में कोई झूठे सपने क्यों सजाए… वक्त की रफ्तार है न रुका था न रुकेगा आएगा, और … Read more

कर `विवेक` को संतुलित

डॉ.एन.के. सेठी बांदीकुई (राजस्थान) ************************************************************************* जिसमें विवेक हो वही,विजय करे संसार। जीवन सार्थक है वही,बाकी सब बेकारll सब विवेक से काम ले,कार्य होय साकार। बिन विवेक सब शून्य है,जीवन बिन आधारll मानव पशु से है अधिक,होता उसको ज्ञान। वैसे तो पशुतुल्य है,इससे अतिशय जानll बिन विवेक संसार में,जीना पशु के तुल्य। जो विवेक से युक्त … Read more

ख्वाब अधूरे रह गये…

पूनम दुबे सरगुजा(छत्तीसगढ़)  ****************************************************************************** बचपन कैसे बीत गए, पल में ओझल हो गए जो सोचा वो पाया नहीं, सपने जैसे खो गए… ख्वाब अधूरे रह गए…l कुछ सपने तो सपने हैं, शायद वो ही मेरे अपने हैं कभी इजहार किया ही नहीं, दिल के अंदर बसते हैं कुछ धुंधले से हो गए… ख्वाब अधूरे रह…l … Read more

हिंदीभाषा माला

मधुसूदन गौतम ‘कलम घिसाई’ कोटा(राजस्थान) *****************************************************************************  (तर्ज:चांदी की दीवार न तोड़ी, प्यार भरा दिल…,रचना विधान-१६,१४ पर यति वाला,ताटक छंद पर आधारित) हे हिंदी तू उर में सजती,सुमन सुगन्धित माला है, तुझसे ही यह भारत विकसित,तैने इसे सँभाला है। तेरे ही आँचल ने पाला,तुझसे सब बहना-भाई, तेरे शब्दों से खेल-खेल,दुनिया में ताकत पाई। तेरे रस-छंद-अलंकारों,ने अपनी … Read more

नैतिक हिन्दी वर्ण माला…

दुर्गेश कुमार मेघवाल ‘डी.कुमार ‘अजस्र’ बूंदी (राजस्थान) ****************************************************************** अ से अनार,आ से आम, पढ़-लिख कर करना है नाम। इ से इमली,ई से ईख, ले लो ज्ञान की पहली सीख। उ से उल्लू,ऊ से ऊन, हम सबको पढ़ने की धुन। ऋ से ऋषि की आ गई बारी, पढ़नी है किताबें सारी। ए से एड़ी,ऐ से ऐनक, … Read more

दर्पण

मनोरमा चन्द्रा रायपुर(छत्तीसगढ़) ******************************************************** अंतर्मन में उत्पन्न भाव को, दर्पण दिखा जाता। चेहरे के हर रंग को, बखूबी बयाँ कर जाता॥ आत्मबोध कराता नित, शीशा,आईना कहाता। हर पल इंसान को, सच्चाई से सरोकार कराता॥ शक्ल पर छाया दृश्य, इससे छिपाए नहीं छिपता। उदासी हो या गम,खुशी, परछाई बन झलकता॥ पारदर्शी गुणों से सुसज्जित, सत्यता से … Read more

कल और आज

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ******************************************** कल ने कल से कहा- कल मिलोगे क्या तुम ? आज सुन कर कल पर हँस वो पड़ा। कल ने पूछा आज से- तुम क्यों हँसे ? तो आज ने कल से कहा- यही सुनते आ रहे हैं वर्षों से, पर जिंदगी में कल कभी आता ही नहीं। और तुम कल … Read more

कलियुग का महाकाव्य `ब्रह्म कल्प देवायण`

आरती सिंह ‘प्रियदर्शिनी’ गोरखपुर(उत्तरप्रदेश) ***************************************************************************************** अपने गुरु अरविंद के आश्रम में मृत्यु पर्यंत रहने वाले डॉ. हजारी द्वारा रचित पुस्तक देवायण को यदि महाग्रंथ कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी,क्योंकि यह पुस्तक वृहत्तम खंडों में लिखी गई है। कुल मिलाकर इसमें १२ खंड है,जिसमें ३६ पुस्तकें हैं। यह भारतीय शास्त्रीय महाकाव्य मीटर अनुष्टुभ छंद में … Read more