भोर
शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान) *********************************************************************************- उगते हुए आदित्य की लाली को है मेरा नमन, छिपते हुए सूरज ने नभ को लाल लाल कर दिया। किरणें आयी भानु की जादू-सा हरसू हो गया, इस धरा को रोशनी से मालामाल कर दिया। खिल गये उपवन सभी औ खिल उठा सारा चमन, फूलों औ कलियों ने गुलशन … Read more