कलयुग

बिनोद कुमार महतो ‘हंसौड़ा’ दरभंगा(बिहार) ********************************************************************* (रचनाशिल्प:३ चौकल+लघु गुरु। सम पाद मात्रिक छंद। प्रति चरण में १५ मात्राएँ।) झूठे वादे मिलता ताज। कैसे सपने देखे आज॥ सच्चा धक्के खाता जाय। लोभी कामी आदर पाय॥ भूले सारे अपना धर्म। ऐसे दिखते सबके कर्म॥ जिनमें अवगुण दीखे खान। पाना चाहे हरदम मान॥ परिचय : बिनोद कुमार महतो का उपनाम … Read more

विवाह

कृष्ण कुमार कश्यप गरियाबंद (छत्तीसगढ़) ************************************************************************** चल पड़ती जीवन की गाड़ी, जिंदगी का खूबसूरत ईंधन है। सात जन्मों की सौगात जिसमें, विवाह एक ऐसा पवित्र बंधन है। अंजान एक-दूसरे से फिर भी, नव प्रगाढ़ रिश्तों में बंध जाते हैं। त्याग,समर्पण,स्नेह कुसुम से, जीवन बगिया खूब महकाते हैं। दीपक बाती बनकर जलते ये, रौशन करते सदा … Read more

तुम हो तो…

दृष्टि भानुशाली नवी मुंबई(महाराष्ट्र)  **************************************************************** हँसाने हेतु तुम हो इसलिए हँसना चाहती हूँ, अश्रु पोंछने हेतु तुम हो तो रोना चाहती हूँ। सुनने के लिए तुम हो तो अल्फाज़ों के गीत गाना चाहती हूँ, सुनाने के लिए तुम हो तो लफ्जों की अंताक्षरी सुनना चाहती हूँ। तालियों की बरसात करने हेतु तुम हो इसलिए नृत्य … Read more

सर्वांग दान कर दूँ

रोहित दाधीच कोटा(राजस्थान) ***************************************************** प्राण माँगे तो प्राण दान कर दूँ, भोग विलास रस जान दान कर दूँ एक बार कह कर तो देखे माँ भारती- दधिचि का वंशज हूँ सर्वांग दान कर दूँl परिचय-रोहित दाधीच राजस्थान राज्य के कोटा शहर के पार्श्वनाथ नगर विस्तार(बोरखेड़ा)में बसे हुए हैं। आपकी जन्मतिथि १८ मार्च १९९३ तथा जन्म … Read more

सावन सरस सुजान

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* सावन श्रंगारित करे,वसुधा,नारि,पहाड़। सागर सरिता सत्यशिव,नाग विल्व वन ताड़ll दादुर पपिहा मोर पिक,नारी धरा किसान। सबकी चाहत नेह जल,सावन सरस सुजानll नारि केश पिव घन घटा,देख नचे मन,मोर। निशदिन सपन सुहावने,पिवमय चाहत भोरll लता लिपटती पेड़ से,धरा चाहती मेह। जीव जन्तु सब रत रति,विरहा चाहत नेहll कंचन काया कामिनी,प्राकृत मय ईमान। … Read more

देश को आलोकित कर गई

डीजेंद्र कुर्रे ‘कोहिनूर’  बलौदा बाजार(छत्तीसगढ़) ******************************************************************** माँ भारती माँ पुकारती, तेरी होगी जय जयकार। फूलों जैसी जिंदगी थी, चेहरे में मुस्कान सजी थी। सुषमा जी अब बिछुड़ गई, लोगों की आँखें नम कर गई। राजनीति की यह धरोहर, देश को आलोकित कर गई। हौंसला बुलंद रखती थी, चंदन बन के महकती थी। भारत की ओ … Read more

कस नकेल अरि आन्तरिक

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** अरि अवसर की ताक में,यायावर चहुँओर। है भुजंग खल देश के,डँसते बनकर चोरll हालाहल विषकुंभ बन,बने मान जयचंद। वतन विरोधी दे बयां,आतंकी अभिनंदll कुलांगार घूमें वतन,बन द्रोही निर्लज्ज। बुला रहे दुश्मन यहाँ,साजिशें रच सज़्जll दे पनाह नापाक को,कर सत्ता सुखभोग। अरबों को हैं लूटते,राष्ट्र प्रगति बन रोगll छोटे … Read more

राखी की सौंधी सुगंध

मच्छिंद्र भिसे सातारा(महाराष्ट्र) ********************************************************************************** मेरी प्यारी बहना एक ऐसी राखी जरुर ले आना, बचपन की यादों की सौंधी सुगंध मुझको तू दे जानाl राखी का उत्साह देखा था मैंने सुबह उठकर जल्दी माँ से, तोतले बोल रूपए माँगे थे तूने याद है आज भी मुझे, राखी न दे पाई बेबस माँ… सफ़ेद धागे को कुमकुम … Read more

कैसे पार जाऊं मैं…

अनिल कसेर ‘उजाला’  राजनांदगांव(छत्तीसगढ़) ****************************************************************************** जग बना आग का दरिया, कैसे तुझे बतलाऊं मैं। नाव है खेवनहार नहीं, कैसे पार जाऊं मैं। हूँ अपनों की महफ़िल में, पर बेगाना कहलाऊं मैं। कोई नहीं तेरे सिवा, मन को कैसे समझाऊं मैं। पाया रब दिल के पास तुझे, खुशियों से कैसे झूम न जाऊं मैं॥ परिचय –अनिल … Read more

ख्यालों के सिवा

श्रीकांत मनोहरलाल जोशी ‘घुंघरू’ मुम्बई (महाराष्ट्र) *************************************************************************** खराब से और खराब क्या होगी, जिन्दगी तू इससे खराब क्या होगी। दिल टूटा तो मैं रोया भी ना था, तू दर्द के सिवा और क्या होगी। मुझे मंजूर है तन्हाईयों में रहना, तू अश्क के सिवा और क्या होगी। सुने ना सुने कोई मेरी बातों को, तू इन … Read more