क्या कसूर था…?

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** अलीगढ़ में मासूम बेटी की घटना पर आधारित……….. एक मासूम-सी वो कली थी, जिसको खिलने भी न दिया बेटी थी वो सबकी, उसको आगे बढ़ने भी न दिया। क्या कसूर था ! उस मासूम कली का, जो फूल भी न बन पाई उसको दरिंदों ने मसल दिया। नन्हें-नन्हें कदम दुनिया में … Read more

कर्म

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** कर्म कर बंदे तू कर्म कर, दिन-रात सुबह-शाम कर्म कर लाख आएं मुसीबतें पथ पर, खड़े रहो तुम कर्म रथ पर। कर्म कर बंदे तू कर्म कर… कर्म कर बंदे तू कर्म कर, असफलताओं से सीख कर बाधाओं से सदैव लड़ कर, बस आगे ही आगे बढ़ सुन्दर … Read more

तुम रुलाना नहीं

केवरा यदु ‘मीरा’  राजिम(छत्तीसगढ़) ******************************************************************* मीत हमको कभी तुम सताना नहीं, दूर जा कर हमें तुम रुलाना नहीं। जी न पायें सजन हम बिना आपके, जान कर तुम हमें आजमाना नहीं। जी रही हूँ तुझे देख कर साजना, तुम नहीं तो कहीं भी ठिकाना नहीं। तुम मुझे यूँ सदा ही हँसाया करो, हाँ कभी तुम … Read more

ये कैसी जवानी है…?

आरती जैन डूंगरपुर (राजस्थान) ********************************************* अलीगढ़ में मासूम बेटी की घटना पर आधारित…… हाथ लगाया तो डर गई, बाहर निकाला तो मर गईl मछली नहीं यह लड़की की कहानी है, नोंच दिया मासूम को ये कैसी जवानी है ? कौन-सा सिखाता है तुम्हें मजहब, दिखाओ हैवानियत का तुम यह करतबl ढंके बदन की करते हैं … Read more

स्तरीय पत्रिकाएं बंद क्यों हुई ?

सुरेंद्र कुमार अरोड़ा ग़ज़ियाबाद(उत्तरप्रदेश)  ************************************************************************* आज मित्रों के बीच बातचीत में गंभीर चर्चा के दौरान अक्सर यह प्रश्न उठ जाता है कि ,”सत्तर-अस्सी के दशक की उच्चस्तरीय पत्रिकाएं,जैसे-साप्ताहिक हिदुस्तान,धर्मयुग के अतिरिक्त सारिका जैसी समर्थ पत्रिकाओं की अनुपस्थिति आज के समय में बहुत अखरती है।इन कालजई पत्रिकाओं के अंक आज भीजब कहीं किसी साहित्यकार मित्र के … Read more

क्या करें,क्यों करें

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ क्या करें,क्यों करें,किसके लिए करें, कोई तो हमें समझाए। मिला है मानव जन्म हमें, तो कुछ अच्छा कर जाएं… ताकि ये जीवन सफल हो जाए। कितना कुछ हम लोगों ने, देश-दुनिया को बदल दिया। पर खुद को हम बदल न पाए, बढ़ते दूसरों के कदमों को, खींचकर पीछे जरूर हम लाए… … Read more

आत्मनिर्भर

अनिता मंदिलवार  ‘सपना’ अंबिकापुर(छत्तीसगढ़) ************************************************** “उमा,कब तक दूसरों के बच्चों से खेलती रहोगी ? अब अपना भी सोचो।” पास खड़ी मिसेज शर्मा ने कहा। उमा बस-“जी चाची जी” ही कह पायी,अब कहे भी क्या ? ऐसी बातों से अब अक्सर उसे दो- चार होना ही पड़ता है। शादी के पाँच वर्ष बाद भी उसकी गोद … Read more

मैं मन हूँ

डॉ.चंद्रदत्त शर्मा ‘चंद्रकवि’ रोहतक (हरियाणा) ******************************************************* मैं मन हूँ विचारों का-भावों का, परिचायक हूँ खुशी का घावों का इच्छा,जीवन गति का जनक हूँ, मैं ही शांति हूँ-में ही भटक हूँ। मैं ही चेतन हूँ-अविनाशी हूँ, सब प्राणियों में मैं सर्वव्यापी हूँ मैं शाश्वत हूँ-न सोता-जागता हूँ, बस चलना मेरा काम-भागता हूँ। जो मुझे जान लेता … Read more

जै जै जै अम्बे मातु भवानी

एन.एल.एम. त्रिपाठी ‘पीताम्बर’  गोरखपुर(उत्तर प्रदेश) *********************************************************** जै जै जै अम्बे मातु भवानी, माँ दुर्गा जग कल्याणी! जै जै जै अम्बे मातु भवानी, माँ दुर्गा जग कल्याणी!! मनोकामना की तू माता,ममता का आँचल, वात्सल्य की मूरत-सूरत,महिमा की माता रानी! जै जै जै अम्बे मातु भवानी, माँ दुर्गा जग कल्याणी!! दुष्ट विनाशक भय भंजक माँ शेरों वाली, … Read more

सवाल

मालती मिश्रा ‘मयंती’ दिल्ली ******************************************************************** ये दिल मेरा कितना खाली है पर इसमें सवाल बेहिसाब हैं, मैं जवाब की तलाश में दर-दर भटक रही हूँ, पर मेरे दिल की तरह मेरे जवाबों की झोली भी खाली है। ये दिल मेरा… भरा है माता-पिता के प्रति कृतज्ञता से, भाई-बहनों के प्रति प्यार और दुलार से, माँ … Read more