नित अश्क बन नवगीत स्वर हूँ

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’ बेंगलुरु (कर्नाटक) **************************************************************************** अल्फ़ाज बनकर हर खुशी अवसाद का आभास हूँ मैं, अश्क हूँ या नीर समझ स्नेह का अहसास हूँ मैं। विरह हो या प्रिय मिलन, हो सफल या अनुत्तीर्ण क्षण माता-पिता अवसान हो, या अंत हो कोई आप्तजन छलकता नित अम्बु बन, चक्षु विरत बस कपोल पर अबाध,अविरल,निष्पंद, प्रश्न … Read more

घर में आई नन्हीं परी

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ************************************************ मेरे घर आई एक,नन्हीं-सी परी, साथ ही खुशियां भी लाई,वो घर में अनेकl मेरे घर आई एक,नन्हीं-सी परीll दादा-दादी की,वो लाड़ली है, नाना-नानी की भी,वो दुलारी हैl मम्मी-पापा की,तो वो जान है, हल्का-सा हँसकर वो,सबको हँसाती हैl मेरे घर आई एक,नन्हीं-सी परी, साथ ही खुशियां भी लाई,वो घर में अनेकll बुआ … Read more

क्यों न मृत्यु का भी उत्सव किया जाए!

सलिल सरोज नौलागढ़ (बिहार) ******************************************************************** एकमात्र शाश्वत सत्य यही, शिव के त्रिनेत्र का रहस्य यही चंडी का नैसर्गिक रौद्र नृत्य यही, कृष्णा-सा श्यामला,राधा-सा शस्य यही। तो क्यों न मीरा-सा इसका भी विषपान किया जाए॥ ये अनादि है,ये अनंत है, ये गजानन का त्रिशूली दंत है यही है गोचर,यही अगोचर, यही तीनों लोकों का महंत है। … Read more

गद्दारों की बोली

पंकज भूषण पाठक ‘प्रियम’ बसखारो(झारखंड) *************************************************************************** निकल पड़ी फिर से जयचंदों की टोली है, सुनो इनकी कैसी ये देशविरोधी बोली है। पाक की मेहबूबा रोई,अब्दुल्ला भन्नाया है, आतंकी आका को अपना दर्द सुनाया है। घर में रह के जो दुश्मन की ख़ातिर रोता है, ऐसे नमकहरामों का कहाँ जमीर होता है। सुनो दिल्ली वालों! तुमने … Read more

`आत्मजा`

विजयलक्ष्मी विभा  इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश) ********************************************************* आत्मजा खंडकाव्य से अध्याय-७ कहते यों बह पड़ीं दृगों से, अविरल दो मोटी धाराएँ निकल पड़ी ज्यों तोड़ स्वयं ही, पलकों की तमसिल काराएँl तारों-सी हो चली शान्त वह, सागर-सी गम्भीर प्रभाती नीरव नभ-सी मूक,किन्तु थी, नहीं हृदय में पीर समाती। हँसने पर कर लिया नियंत्रण, मुस्कानों तक सीमा बाँधी आ … Read more

स्मृति

प्रभावती श.शाखापुरे दांडेली(कर्नाटक) ************************************************ काली अंधियारी रात में मेरा साया हँसा मुझ पर, हे मन बावरे काहे खोजे तू उसे जो तेरे साथ नहींl माना कि तेरे पास नहीं है, क्योंकि,वह तो बसी तेरी स्मृति में। मूँद ले अपनी पलकों को, पायेगा उसकी छवि देखेंगी निहार कर, अश्क बहेंगे प्रियतम के, भीगेगा तेरा मन क्योंकि,वह … Read more

छाया बसंत ️

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** छाया बसंत अब दिक् दिगंत, है सुरभित छवि बहु दिशि बसंत। फूटे हैं कोमल नवल अंग, तरु-पुष्प-लता लद गये वृंतll मधुरस फैला चहुँओर आज, है मधुर-शांत-निर्मल प्रवाह। मदमस्त मधुर-मन मुग्ध मंत्र, कर रहा सुभाषित जग अनंतll नीलांबर मधुमय आज हुआ, मार्तंड-रश्मि से तृप्त हुआ। नव-बाल-अरुणिमा लिये अर्क, सौंदर्य से धरा … Read more

जवानी

अमल श्रीवास्तव  बिलासपुर(छत्तीसगढ़) ********************************************************************* बहुत कुछ कर गुजरने को,मचलती भावनाएं जब, नहीं अन्याय सह पाती,रगों में वह रवानी है। न केवल उम्र से ही वास्ता होता है सब उसका, जवानी जगमगाती ज्योति की उज्ज्वल निशानी है॥ देश के दुश्मनों का जो,कलेजा चीर कर रख दे, लगाए जख्म में मरहम,हृदय की पीर जो हर ले। अनीति … Read more

हड़ताल और बीमार बेटा

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) ****************************************************************** मन अनहोनी की शंका से, थर-थर-थर-थर कांप रहा है आधी रात हुई है बेटा, पल-पल देखो हाँफ रहा है। अस्पताल जाना है लेकिन, हड़ताल अभी तक जारी है लोगों की यह मारा-मारी, इसके जीवन पर भारी है। बंद रहेगी सड़क अगर तो, कैसे होगा काम बताएं अगर इलाज नहीं … Read more

चलो कुछ दूर यूँ ही साथ-साथ

डॉ.किशोर जॉन इंदौर(मध्यप्रदेश) ************************************************************** चलो कुछ दूर यूँ ही साथ-साथ, ज़िन्दगी का साथ हो मुमकिन नहीं रोज़ मुलाक़ात हो मुनासिब भी नहीं, कुछ यू ही हो अफ़सानी बातें कुछ हँसी-कुछ मुस्कुराहटें। कुछ पुरानी,कुछ नई बातें, बस चलना है साथ-साथ किसी का साथ अच्छा लगता है, एक सुकून ठण्डा-सा एहसास पहली बरसात की बूंदों-सा, सुबह फूलों … Read more