वक्त का ये पहिया

मोहित जागेटिया भीलवाड़ा(राजस्थान) ************************************************************************** गुजर जाते हैं वो दिन, जिसे मैं याद करता हूँl लौट नहीं आते वो दिन, जिसे मैं याद करता हूँ। वक्त का ये सफ़र निकल रहा है, ज़िंदगी के साथ-साथ ये चल रहा है। अवसर,आशा बन रही है, कुछ ख़्वाब,कुछ यादें सज रही है। जो बीत रहा है,वो बीत रहा है, … Read more

टेलीविजन

निर्मल कुमार जैन ‘नीर’  उदयपुर (राजस्थान) ************************************************************ टेलीविजन- कहाँ क्या हो रहा है, सब बताताl टेलीविजन- घर बैठे जग की, सैर कराताl टेलीविजन- अमूल्य धरोहर, हमें दिखाताl टेलीविजन- ये जुल्म-गुनाह से, पर्दा उठाताl टेलीविजन- दुनिया का सामान्य, ज्ञान कराताl परिचय-निर्मल कुमार जैन का साहित्यिक उपनाम ‘नीर’ है। आपकी जन्म तिथि ५ मई १९६९ और जन्म … Read more

सिले रहे होंठ..रुंधा रहा गला

कुँवर प्रताप सिंह कुंवर बेचैन प्रतापगढ़ (राजस्थान) ********************************************************************** वह कहता था वह सुनती थी, जारी था एक खेल कहने-सुनने का। खेल में थी दो पर्चियाँ एक में लिखा था ‘कहो’, एक में लिखा था ‘सुनो।’ अब यह नियति थी, या महज़ संयोग ? उसके हाथ लगती रही वही पर्ची जिस पर लिखा था ‘सुनो।’ वह सुनती … Read more

जीवन

तेजस अशोक राजपुरे नवी मुंबई(महाराष्ट्र)  *********************************************************************** जीवन में हम कई बार चीजों के लिए हमारा कीमती समय व्यर्थ कर देते हैं । हम कुछ पाने की आशा में,जो है उसे खो देते हैं,पर यही तो जीवन का आधार है- ‘कुछ पा कर खोना है, कुछ खो कर पाना है।’ हम अगर जो चीज है,उसी में … Read more

काश मैं मोबाइल होती!

आरती जैन डूंगरपुर (राजस्थान) ********************************************* काश मैं महंगे वाला प्यारा-सा मोबाइल होती, उनकी बाँहों में उनके तकिये के पास सोती। उनकी खाने की थाली के पास हमेशा रहती, उनकी उंगली के और अंगूठे संग हमेशा बहती। बहाने बनाकर आप मुझे रखते करीब, काश! मोबाइल बनना होता मेरा प्यारा नसीब। जब भी मेरी बजती वो प्यारी-प्यारी … Read more

कहां है मुंसिफ…

प्रदीपमणि तिवारी ध्रुव भोपाली भोपाल(मध्यप्रदेश) **************************************************************************** वो बेग़ुनाह कहे खुदा तमाम कहां। कहां है मुंसिफ यार तामझाम कहां। फ़क़त इरादों में बसा रखा था जो, हमी हैं साहिब वो मगर ग़ुलाम कहां। उधार मांगी थी ज़रा-सी साँसें बस, किया ज़िबाह मगर खुदा-ए-आम कहां। सहर हुई औ रोज़ शाम शाम हुई, जो पुरखुलूस कराए दीद शाम कहां … Read more

जनता मालिक है मगर…

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** नेताओं की बात पर,मत करना मतभेद। लोकतंत्र की नाव में,ये करते हैं छेद॥ कुछ नेता गूंगे यहाँ,कुछ इतने वाचाल। एवरेस्ट के शीर्ष को,कहते हैं पाताल॥ सेवक देखो देश के,रहते मालामाल। जनता मालिक है मगर,नौकर सा है हाल॥ जनता जब बीमार हो,काटे हाय कलेश। सर्दी भी होती अगर,नेता चले विदेश॥ … Read more

कल,आज और कल

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** कल की बातें कौन जाने, आज के लिए ही है जीना कल से ही शिक्षा लेकर, कल को है हमें सँवारना। जाने कल हुई है क्या गलतियां, आज नहीं है हमें उसे दोहराना आज करें अवश्य सत्कर्म हम, जिससे पड़े ना कल पछताना। थी जो कल हमारी अच्छाई, … Read more

मोहन के प्रेम रंगो

सुबोध कुमार शर्मा  शेरकोट(उत्तराखण्ड) ********************************************************* प्रेम करो मोहन से, जहां खुशियां बिलसे। मोह माया छोड़ राधा, चरणों में जाइए॥ मोहन के प्रेम रंगो, ज्ञान तिमिर से जगो। मुरली की तान सम, मन में बजाइए॥ सुमन से काम करो, दु:ख भाव नाही धरो। भगवत भजन को, उर में समाइये॥ मोह उर से निकाल, कुकर्म न होय … Read more

विराजित हैं आप सकल प्राणों में

गोपाल चन्द्र मुखर्जी बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************************************ प्रतिपल सुन रहा हूँ,आपकी निशब्द पदध्वनि अंतरमन से,आपका आगमन, निर्भीक हूँ मैं,आपकी प्रतीक्षा में कब होगा महामिलन! जानता हूँ मैं, रहूंगा विलय आपमें, ले जाएंगे आप,अपने साथ- अंतहीन महागर्भ में, हे कालभैरवी माते। श्रृंगाररत हूँ जन्मलग्न से, वर्धित काया-कांति- यतन से,रूप-रस से, सुरक्षित है आपकी आहुति। जाने के पहले,चाहता … Read more