देख रहे पंडालों में

बिनोद कुमार महतो ‘हंसौड़ा’ दरभंगा(बिहार) ********************************************************************* हृदय के दुर्गा को न देखे, देख रहे पंडालों में। चकाचौंध का महिषासुर ही, अब मस्तिष्क के खालों में। लौह पुरुष के स्टेच्यू पर, आज फब्तियाँ कसते जो। करोड़ों के पंडाल खड़ा कर, चंदे सब पर कसते वोll ध्यान धर्म की जगह दिखावा, देख आह कंगालों में। हृदय के … Read more

मंज़र नहीं देखा…

वकील कुशवाहा आकाश महेशपुरी कुशीनगर(उत्तर प्रदेश) *************************************************************** भीतर की हलचलों का वो मंज़र नहीं देखाl सबने मुझे देखा,मेरे अंदर नहीं देखाl सब लोग मानते रहे हैं कोयला मुझे, हीरे को जौहरी ने भी छूकर नहीं देखाl हँसते हुए ही तो मुझे देखा है रात-दिन, अश्कों का मेरे तूने समंदर नहीं देखाl घायल जो मैं हुआ हूँ … Read more

फल मिलता है

संजय जैन  मुम्बई(महाराष्ट्र) ******************************************** यदि हो ईमानदार और मेहनती तो, हर लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हो। और किया जिसके साथ तुमने कार्य, तो वो तुम्हें यादों के साथ बहुत सराहेगा। और वक्त आने पर साथ, तुम्हारे खड़ा हो जाएगा। यही तो कर्मठ निष्ठावान, लोगों की पहचान होती है। जिसे मिल जाये, बिना मेहनत के … Read more

गाँवों को शहर खा गया

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’ रावतसर(राजस्थान)  ********************************************************************************* उजड़ रहे हैं गाँव बिचारे शहर खा गया गाँवों को, ऐसा लगता अपने हाथों काट रहा खुद पाँवों को। और बहुत की चाहत में खेती करना छोड़ दिया, बहुत कमायेंगे शहरों में, कहकर गाँव छोड़ दिया। मेहनत से रिश्ता तोड़ा, शहरों से नाता जोड़ा है, खून-पसीने से जो मिलता … Read more

अब बस

अरुण कुमार पासवान ग्रेटर नोएडा(उत्तरप्रदेश) ******************************************************************* कितनी जिज्ञासु हैं आँखें! देखना चाहती हैं कितना कुछ बहुत कुछ,सब कुछ; इसलिए चहेती हैं, मन की,दिल की,पूरे जिस्म की। ये देती हैं भूख,पूरे जिस्म को, लालच भी देती हैं,भटकाती भी हैं पर शिकायत पर,झुक जाती भी हैं, इसलिए और भी चहेती हो जाती हैं। जहाँ तक पहुँचती हैं, … Read more

प्रखर गूँज प्रकाशन द्वारा नई साहित्यिक पहल:सिर्फ ४००० रुपए में छपवाएं सुंदर पुस्तक

नई दिल्ली। प्रखर गूँज प्रकाशन की तरफ से हिन्दी-अंग्रेजी के साहित्यकारों के लिए नवीन पहल की गई है। सिर्फ ४००० रुपए अदा करने पर योजनान्तर्गत पुस्तक की जाएगी। प्रकाशन की संस्थापिका और प्रमुख सम्पादक नीलू सिन्हा ने बताया कि इस योजना के तहत जिस पुस्तक का चयन किया जाएगा,उसके लेखक को कॉपीराइट और अनुबंध राशि … Read more

सिगरेट बोले रे…

राजेश पड़िहार प्रतापगढ़(राजस्थान) *********************************************************** (रचना शिल्प:तर्ज-झुमका गिरा रे बरेली के बाजार में) सिगरेट बोले रे,जीवन की मंझधार में,सिगरेट बोले रे…, चाचा आओ ताऊ आओ,छत पर लो सुलगाओ, जी कर क्या करना है,मेरे संग में मौज उड़ाओl बीड़ी बोली ना ना बाबा,ना मुझको छोड़ कर जाओ, और तंबाकू कहती देखो,आकर मुझको खाओl हाँ आकर मुझको खाओ, … Read more

स्नेहमयी माँ

गोपाल चन्द्र मुखर्जी बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ************************************************************ शरतकाल,ऋतु चक्र में, आई है माँ धरती में। उल्लास भरे प्रकृति में, श्रृंगार किये रंग-बिरंगे साजों से। शुभ्र बादलकी कश्ती से, तैरने लगे मन मुक्ताकाश में। धान का शीश झूमे क्षेत्रों में, हिमेल हवा के हिल्लोल से। शुभ्र ज्योत्स्ना के स्पर्श से, कुश के वन भी नाचने लगे। माँ,आपके … Read more

जान प्यारी है या पैसे ?

डॉ.वेदप्रताप वैदिक गुड़गांव (दिल्ली)  ********************************************************************** केन्द्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए मोटर वाहन अधिनियम को लेकर देश में विचित्र विवाद चल पड़ा है। इस अधिनियम को लाने का श्रेय केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी को है। केन्द्र में भाजपा की सरकार है लेकिन इसी पार्टी की कुछ प्रांतीय सरकारों ने इस अधिनियम को लागू करने … Read more

जगराता

बोधन राम निषाद ‘राज’  कबीरधाम (छत्तीसगढ़) ******************************************************************** माता के दरबार में,जोत जले दिन-रात। आओ भक्तों कर चलो,माँ से सौ-सौ बात॥ जगराता में मातु का,मंदिर जगमग होय। दर्शन देते मातु है,अर्ज करे सब कोय॥ ढोलक बाजत साज है,नाचत है सब झूम। बालक वृद्ध जवान भी,देख रहे हैं घूम॥ जगराता करते सभी,रहते हैं उपवास। माता सबके दिल … Read more