गांधी

सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’ कोटा(राजस्थान) *********************************************************************************** महात्मा गाँधी जयंती विशेष……. आजादी का फूँककर,आमजनों में मंत्र। गांधी जी ने कर दिया,भारत देश स्वतंत्र॥ साधन पावन ही रहें,था गांधी का जोर। चाहे देरी से मिलेे,हमें लक्ष्य का छोर॥ गांधी का जीवन रहा,सच के साथ प्रयोग। जिससे लग पाया नहीं,उन्हें रूढ़ि का रोग॥ गांधी में कमियाँ रही,थे वे भी … Read more

बेटी

राजेश पड़िहार प्रतापगढ़(राजस्थान) *********************************************************** भारी उसका पेट था,सास चाहती लाल। लेकिन किस्मत चल गयी,देख अनोखी चाल। देख अनोखी चाल,जनी है उसने बेटी। खोल रही है सास,रोज तानों की पेटी। साफ चमकती आज,सास की है लाचारी। चली सदन ‘राजेश’,बहू के पद थे भारी। मिलती रही प्रताड़ना,गरल उतारे नार। गुड़िया के डग ले रहे,रोज नये आकार। रोज … Read more

मेरी माँ आ रही है

सौदामिनी खरे दामिनी रायसेन(मध्यप्रदेश) ****************************************************** छम-छम की धुन देखो कानों में आ रही है, बजती देखो पायल,मेरी माँ आ रही है। भक्तों आई टोली जयकारे लगा रही है, गीतों में मधुर वाणी नव साज दे रही है। छम-छम की…॥ कष्टों को दूर करने दीनों का दु:ख हरने, हमको सुखी बनाने देखो मेरी माँ आ रही है। … Read more

गाँधी जी

राजू महतो ‘राजूराज झारखण्डी’ धनबाद (झारखण्ड)  ************************************************************************** महात्मा गाँधी जयंती विशेष….. जब अंग्रेजों का बढ़ गया था अत्याचार, और हमारी संगठन शक्ति हो गयी थी बेकार… ऐसे में एक संत महान लिए अवतार, आज कराएंगे हम आपका उनसे सरोकार। सन १८६९ का था समय, हुआ गाँधी जी का उदय… थे वे सत्य और अहिंसा की … Read more

पीड़ा हर सकूँ सबकी

सतीश विश्वकर्मा ‘आनंद’ छिंदवाड़ा (मध्यप्रदेश) ****************************************************************************** मुझे आशीष दो इतना कि ऊँचा नाम बन जाऊँ, पीड़ा हर सकूँ सबकी अगर घनश्याम बन जाऊँ। करूँ परिवार की खातिर कि जो भी हो करम मेरा, पिता का पुत्र ऐसा हो कि घर का राम बन जाऊँ॥ परिचय-सतीश विश्वकर्मा का साहित्यिक उपनाम `आनंद` हैl जन्म २८ अप्रैल १९८५ … Read more

फूल

बाबूलाल शर्मा सिकंदरा(राजस्थान) ************************************************* रखूँ किस पृष्ठ के अंदर, अमानत प्यार की सँभले। भरी है डायरी पूरी, सहे जज्बात के हमले। गुलाबी फूल-सा दिल है, तुम्हारे प्यार में पागल- सहे ना फूल भी दिल भी, हकीकत हैं,नहीं जुमले। सुखों की खोज में मैंने, लिखे हैं गीत अफसाने। रचे हैं छंद भी सुंदर, भरोसे वक्त बहकाने। … Read more

आत्मबोध का क्षण

इलाश्री जायसवाल नोएडा(उत्तरप्रदेश) ******************************************************* ‘एकाकी’ का अर्थ है अकेला। कहने को तो यह अकेलेपन का बोध कराता है किन्तु है बहुत ही विस्तृत..। समूह में या सबके सामने हम स्वयं को प्रस्तुत करते हैं,अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं,पर ‘क्या और कैसे’ इसकी उत्पत्ति एकाकी क्षणों में ही होती है, क्योंकि हम उन एकाकी क्षणों … Read more

उजाले- अंधेरे

डॉ.धारा बल्लभ पाण्डेय’आलोक’ अल्मोड़ा(उत्तराखंड) ****************************************************************************** उजाले-अंधेरे संग चलते हैं, मगर दोनों विपरीत ही पलते हैं। उजाला नहीं ऐसे आता है जग में, नहीं उजाला खुद होता है मन में। प्रयत्न से ही मिलता उजाला, जीवन अंधेरा मिटाता उजालाll ज्ञान का दीप ही अज्ञान मिटाए, नफरत को जग से प्रेम हटाए। जब तक बना ही रहेगा … Read more

कवि हैं हम

मच्छिंद्र भिसे सातारा(महाराष्ट्र) ********************************************************************************** अच्छा हुआ नेता नहीं हूँ, जो चुनाव में भी चूना पान को नहीं, भोली जनता को लगाते हैं। हम सम्मान से नहीं, शब्दों से शान बढ़ाते हैं वह कवि हैं हम, जीवन सुख-दु:ख के गीत हम गाते हैं। नेता और कवि एक मंच पर जब भी मिलते हैं, एक वचनों से … Read more

वफ़ा का फ़साना

कैलाश झा ‘किंकर’ खगड़िया (बिहार) ************************************************************************************ मुझे भी सुनाना, वफ़ा का फ़साना। न भूलूँ कभी मैं, न मुझको भुलाना। हुआ हूँ मैं तेरी, नज़र का निशाना। चलेगा न अब वो, तुम्हारा बहाना। मुहब्बत का दुश्मन, है सारा ज़माना। यकीनन तेरा मैं, तू मेरा दिवाना। न मायूस होकर, तू आँसू बहाना । सुकूं दे रहा है, … Read more